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पंजाब की बेटी और यूपी की बहू से दिल्ली की सीएम तक कुछ ऐसा रहा शीला दीक्षित का सफर

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित अब हमारे बीच नहीं रहीं। शीला दीक्षित ने 81 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। दलगत राजनीति से अलग सभी दलों के नेता उन्हें पूरा सम्मान देते थे

Sheila Dixitन्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (21 जुलाई): दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित अब हमारे बीच नहीं रहीं। शीला दीक्षित ने 81 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। दलगत राजनीति से अलग सभी दलों के नेता उन्हें पूरा सम्मान देते थे। दिल्ली के विकास के लिए किए शीला दीक्षित के काम हमेशा याद किए जाएंगे। दिल्ली में पब्लिक ट्रांसपॉर्ट ठीक करना और हरियाली उनकी प्राथमिकता रहे। वे राजनीति में आने से पहले कई संगठनों से जुड़ी रही हैं और उन्होंने कामकाजी महिलाओं के लिए दिल्ली में दो हॉस्टल भी बनवाए।

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शीला दीक्षित का जन्म 31 मार्च 1938 को पंजाब के कपूरथला में हुआ था।  उन्होंने दिल्ली के जीसस एंड मेरी कॉन्वेंट स्कूल में शिक्षा पाई और दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस से इतिहास में मास्टर डिग्री हासिल की थी।उनका विवाह उन्नाव (यूपी) के आईएएस अधिकारी स्वर्गीय विनोद दीक्षित से हुआ था। विनोद कांग्रेस के बड़े नेता और बंगाल के पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय उमाशंकर दीक्षित के बेटे थे। शीला के बेटे संदीप दीक्षित भी दिल्ली के सांसद रह चुके हैं।

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शीला दीक्षित 1984 से 1989 तक कन्नौज लोकसभा सीट से सांसद रही थीं। इस दौरान तीन साल केंद्रीय मंत्री पद भी संभाला। इस दौरान वे लोकसभा की समितियों में रहने के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र में महिलाओं के आयोग में भारत की प्रतिनिधि रहीं। वे बाद में केन्द्रीय मंत्री भी रहीं। वे दिल्ली शहर की महापौर से लेकर मुख्‍यमंत्री भी रहीं। दीक्षित इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की सचिव भी रह चुकी हैं, साथ ही वे दिल्ली कांग्रेस की अध्‍यक्ष भी रह चुकी हैं।

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शीला पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय थीं, लेकिन लगातार 4 लोकसभा चुनाव हारने के बाद 1998 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें दिल्ली की जिम्मेदारी दी। शीला ने चुनाव में पार्टी की कमान संभाली और चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने 2013 तक तीन कार्यकाल बतौर मुख्यमंत्री पूरे किए थे। 2014 में उन्हें केरल का राज्यपाल बनाया गया था। हालांकि, उन्होंने 25 अगस्त 2014 को इस्तीफा दे दिया था। वे इस साल उत्‍तर-पूर्व दिल्‍ली से लोकसभा चुनाव लड़ी थीं। हालांकि, उन्हें भाजपा के मनोज तिवारी के सामने हार मिली।

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इसके साथ ही वे विवादों से भी जुड़ी रही हैं और उन पर भाजपा की एक नेत्री ने सरकारी राशि का दुरुपयोग करने का आरोप भी लगाया था। कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान भी उन पर इसी तरह के आरोप लगे थे। जेसिका लाल हत्याकांड के मुख्य आरोपी मनु शर्मा को पैरोल पर रिहा करने को लेकर भी उन पर आरोप लगे हैं।

ज्यादा जानकारी के लिए देखिए न्यूज 24 की ये खास रिपोर्ट...


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