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जब भारतीय सेना ने बचाई थी शेख हसीना की जान, इंदिरा ने दी थी शरण

नई दिल्ली (8 अप्रैल): बांग्लादेश की वर्तमान प्रधानमंत्री शेख हसीना का भारत से पुराना रिश्ता है। 1971 की लड़ाई में भारतीय सेना के जांबाजों ने जहां बांग्लादेश को आजादी दिलाई वहीं उनके पिता और सगे संबंधियों को बचाया। 1971 में मिली आजादी के बाद शेख हसीना के पिता शेख मुजीब रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने। लेकिन महज 4 साल बाद 1975 में वहां तख्ता पलट हुआ। बांग्लादेश की सेना के अफसरों ने उनके पिता शेख मुजीब, उनकी मां और तीन भाइयों को मार डाला। उस वक्त शेश हसीना और उनकी बहन ब्रसेल्स में थी लिहाजा वो बच गईं। इसके बाद शेख हसीना ने भारत से पनाह मांगा। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शेख हसीना, उनके पति और उनकी बहन रेहाना को राजनीतिक शरण देने के लिए तुरंत तैयार हो गईं। बांग्लादेश में तख्तापलट के महज 9 दिनों के अंदर 24 अगस्त को शेख हशीना अपने परिवार के साथ भारत पहुंची और यहां तकरीबन 6 साल तक रहीं।

1981 में जनरल ज़िया-उर-रहमान तख़्ता पलट की कोशिश में मारे गए और अब्दुस सत्तार राष्ट्रपति बने। इसके बाद शेख हसीना की अपने परिवार के साथ बांग्लादेश वापसी संभव हो पायी। इसके 15 साल बाद यानी 1996 में अवामी लीग सत्ता में लौटी और शेख हसीना बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं।

अपने 6 साल लंबे भारत प्रवास के दौरान शेख हसीना ने भारत को काफी नजदीक से महसूस किया। इस दौरान शेख हसीना का इंदिरा गांधी कैबिनेट में महत्वपूर्ण ओहदा संभाल रहे वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से परिवारिक संबंध रहा। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की पत्नी शुभ्रा मुखर्जी बुरे दिनों में शेख हसीना की सबसे खास सहेली थीं। आपको बता दें कि 2015 में जब शुभ्रा मुखर्जी का देहांत हुआ तो उन्हें श्रद्धांजलि देने खुद शेख हसीना भारत आईं।


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