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ढूंढ ली गई ग्लोबल वार्मिंग की असरदार काट, CO2 को बदला 'पत्थर' में!

 

नई दिल्ली (10 जून) :  बढ़ते प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग से पूरी दुनिया परेशान है। लेकिन वैज्ञानिकों ने एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है जिससे कि जलवायु परिवर्तन की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकेगा। इस तकनीक में वैज्ञानिकों को ग्रीनहाउस गैस कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2)  को पत्थर जैसे ठोस आकार में बदला जा सकेगा। इसमें महीनों तक CO2  को ज़मीन में गहराई तक पंप किया गया। इस प्रोजेक्ट को 'कार्बफिक्स' नाम दिया गया है।

ये बहुत अहम प्रयोग आईसलैंड में किया गया। इसमें CO2 उत्सर्जन को पानी के साथ ज़मीन के सैकड़ों मीटर नीचे पम्प किया गया। जहां ये ठोस आकार में बदल गई।

'जरनल साईंस' में प्रकाशित स्टडी के मुख्य शोधकर्ता जुरेग मैटर ने कहा, "हमें बढ़ते कार्बन उत्सर्जन से निपटना है। इस तरह स्थायी स्टोरेज का निदान ढूंढा जा सकता है कि इन्हें पत्थर में बदल दिया जाए।"  

बता दें कि ग्लोबल वार्मिंग के लिए CO2  एक प्रमुख कारक है। यही वजह है कि विशेषज्ञ कार्बन कैप्चर और स्टोरेज (CCS) के लिए नए नए समाधान ढूंढते रहते हैं।

पहले भी CO2 को सैंडस्टोन मिट्टी में बदलने की कोशिश की गई थी लेकिन सफलता नहीं मिली थी।

लेकिन अब आईसलैंड के हैलीशैदी प्लांट में कार्बफिक्स प्रोजेक्ट के तहत CO2 को ठोस आकार में बदलने में सफलता मिली है। यहां दुनिया का सबसे बड़ी जिओथर्मल फैसिल्टी है। इस प्लांट में हर साल 40 हज़ार टन का उत्पादन होता है। हालांकि ये इसी तरह के कोयला प्लांट से होने वाले उत्सर्जन का 5 फीसदी है। 2012 में यहां 250 टन CO2  को पानी के साथ ज़मीन के सैकड़ों मीटर अंदर पंप करना शुरू किया गया।   

रेक्जाविक एनर्जी प्रोजेक्ट प्रमुख एड्डा एराडोटिर ने कहा कि ये बहुत ही स्वागतयोग्य सरप्राइज़ है।

 


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