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SC का HIV ग्रस्त रेप पीड़िता को गर्भपात की अनुमति से इनकार

नई दिल्ली (9 मई): सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात को लेकर आज एक बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने पटना की एक HIV ग्रस्त रेप पीड़ित महिला को 26 हफ्ते के भ्रूण के गर्भपात की अनुमति नहीं दी। इससे पहले एम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इससे महिला की जान को खतरा है, लिहाजा इस स्टेज पर अबॉर्शन ठीक नहीं होगा। इसके बाद एम्स के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर पीड़िता की गर्भपात की याचिका को खारिज कर दी।

साथ ही कोर्ट ने बिहार सरकार को रेप विक्टिम फंड से चार हफ्ते के भीतर पीड़िता को तीन लाख रुपये देने के आदेश दिए है। कोर्ट ने कहा कि महिला के इलाज का सारा खर्च बिहार सरकार उठाएगी और इलाज पटना के इंदिरा गांधी इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में होगा।

दिल्ली का एम्स महिला के लिए ट्रीटमेंट ड्राफ्ट बनाकर देगा ताकि होने वाले बच्चे को HIV से बचाया जा सके। कोर्ट महिला के मामले में हुई देरी पर भी बिहार सरकार द्वारा मुआवजा तय करेगा। महिला की ओर से हलफनामा दाखिल होगा और बिहार सरकार इसका जवाब देगी। इस मामले में अगली सुनवाई 9 अगस्त को होगी।

दरअसल पटना की सड़कों पर रहने वाली 35 साल की महिला के साथ रेप हुआ था। रेप की वजह से वह गर्भवती हो गई थी और बाद में उसे पटना के एक NGO के यहां रखा गया। मेडिकल जांच में पता चला कि वह गर्भवती है तो पटना हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने सरकारी डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड बनाया, जिसने रिपोर्ट में कहा कि इसके लिए मेजर सर्जरी करनी पड़ सकती है। हाईकोर्ट ने गर्भपात की इजाजत देने से इंकार कर दिया और महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। महिला को उसके पति ने 12 साल पहले छोड़ दिया था।


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