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बिहार के नियोजित शिक्षकों में निराशा और चिंता का माहौल

बिहार के करीब 3.5 लाख नियोजित शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए इस मामले में बिहार सरकार की अपील मंजूर कर ली है। कोर्ट ने पटना उच्च न्यायालय के उस फैसले को खारिज कर दिया है जिसमें समान काम के बदले समान वेतन देने का निर्णय दिया गया था

नितेश रंजन, न्यूज24 ब्यूरो, बेगूसराय (10 मई):  बिहार के करीब 3.5 लाख नियोजित शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए इस मामले में बिहार सरकार की अपील मंजूर कर ली है। कोर्ट ने पटना उच्च न्यायालय के उस फैसले को खारिज कर दिया है जिसमें समान काम के बदले समान वेतन देने का निर्णय दिया गया था। कोर्ट के इस फैसले को बिहार के नियोजित शिक्षकों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। 

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिहार के नियोजित शिक्षकों के मामले में दिए गये निर्णय से राज्य के तकरीबन 3.5 लाख शिक्षकों को भारी निराशा हाथ लगी है। समान काम के लिए समान वेतन की आस लगाए नियोजित शिक्षक सुप्रीम कोर्ट में लम्बी लड़ाई के बाद अपने पक्ष में फैसले की उम्मीद लगाए बैठे थे लेकिन आखिरकार जब फैसला आया तो इनकी उम्मीदों ने जैसे न्याय के सुप्रीम दरवाजे पर दम तोड़ दिया।  

बेगूसराय में तकरीबन 6 माह से बीमार चल रहे एक नियोजित शिक्षक मुकेश मिश्रा का परिवार भी इस फैसले से हताश है। मुकेश मिश्रा बलिया प्रखंड के मध्य विद्यालय गोखले नगर में सामाजिक विज्ञान के शिक्षक हैं और बीते छः माह से बीमार चल रहे हैं। हाल ही में उनका ऑपरेशन हुआ है। महंगाई के इस दौर में अपनी पत्नी और दो बच्चों का जिम्मा मुकेश पर ही है। पैतृक गाँव से विद्यालय की अत्यधिक दूरी होने के कारण मुकेश का  परिवार शहर में दो कमरे के किराए के मकान में रहता है। लेकिन एक तो बहुत कम वेतन और महीनों- महीनों तक वेतन नहीं मिलने से ये परिवार भी अन्य शिक्षकों के परिवार की तरह ही परेशान है। ऊपर से इलाज का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। 

मुकेश मिश्र कहते हैं कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के फैसले से काफी उम्मीद थी लेकिन आज के फैसले ने उन्हें निराश किया है और कहते हैं कि इसका प्रभाव आगामी चुनाव में दिखेगा। मुकेश के परिवार के सदस्यों को भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर आस थी। मुकेश मिश्र की पत्नी सिंटू कुमारी का कहना है कि एक तो पहले से ही घर का बजट नहीं चल पा रहा और ऊपर से इलाज का खर्च। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट से बहुत उम्मीद थी लेकिन इस फैसले ने सारी उम्मीदें तोड़ दी।


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