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गरीबों को बड़े महंगे पड़ रहे हैं मोदी जी के यह ई-रिक्शा

वरुण सिन्हा/शिवांग माथुर/मोहम्मद यूसूफ, नोएडा (27 अप्रैल): आपको याद होगा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच अप्रैल को नोएडा में 5100 ई-रिक्शा बांटे थे। न्यूज़ 24 ने दिखाया था कि हफ्ते भर बाद में वो रिक्शे किसी को नहीं मिले थे। वजह थी देश का सुस्त और लाल फीताशाही में उलझाने वाला सरकारी तंत्र, लेकिन अब तो तीन हफ्ते बीतने के बाद भी वो ई-रिक्शे जस के तस नोएडा में खड़े हैं।

पांच अप्रैल को उत्तर प्रदेश के नोएडा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुद्रा योजना के तहत अपने हाथ से 5100 ई रिक्शा बांटे थे। गरीबों को इन ई-रिक्शा के जरिए प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार ने बड़े-बड़े सपने दिखाए। लेकिन तीन हफ्ते बाद भी पीएम के बांटे हुए रिक्शे आजतक सड़कों पर नहीं उतरे हैं। आपके चैनल ने पहले इस आयोजन के एक हफ्ते बाद ही इन ई-रिक्शों के जस के तस खड़े रहने पर रिपोर्ट की थी।

लेकिन जब उस आयोजन के तीन हफ्ते बीतने के बाद भी न्यूज़ 24 ने दोबारा पड़ताल की तो पाया कि नोएडा के सेक्टर 62 के उसी मैदान में अब भी वो ई-रिक्शे जस के तस ही खड़े हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री के हाथों बंटवाया गया था। प्रधानमंत्री के कर-कमलों से बांटे गए इन ई-रिक्शा के लिए ड्राइवर को लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और परिवहन विभाग से रूट परमिट जरूरी है, लेकिन मामला तो फाइलों में और विभागों के बीच ही फंसा हुआ है। मामला सिर्फ इतना नहीं है, भारतीय माइक्रो क्रेडिट यानी वो कंपनी जिसके जिम्मे इन ई-रिक्शों को फाइनेंस करने की जिम्मेदारी है। उसे तो दावा है कि ड्राइवर ही नहीं मिल रहे हैं। क्योंकि बताया जा रहा है कि अगर BMC के जरिए ई-रिक्शा खरीदीए तो ये 1.60 लाख रुपए से 1.70 लाख रुपए तक का बैठता है। जबकि दावा है कि लोकल डीलर से यही ई-रिक्शा 62 हजार रुपए में मिल रहा है।

अब जब ये बात सामने आई तो बीएमसी के चेयरमैन ई-रिक्शा वहीं मैदान में खड़े रहने के पीछे वजह कुछ और बताने लगते हैं।   उधर इन आरोपों के जवाब में आरटीओ वाले दो हफ्ते पहले से कहते आ रहे हैं कि हम क्या जानें। हमारे पास तो एक भी रिक्शे की फाइल ही नहीं आई, जब आएगी तो देख लेंगे। पता नहीं कागज कब आएगा। आएगा तो उसका क्या होगा और जो होगा उससे किसका भला होगा। इसपर नोएडा के सांसद और केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा जिन्होंने सारा आयोजन कराया था, वो पहले से ही ठीकरा यूपी सरकार के पल्ले फोड़ते दिखे हैं।

मतलब ये है कि प्रधानमंत्री के हाथों ई-रिक्शा बंटवाकर वाहवाही तो सरकार ने लूट ली, लेकिन वो ई-रिक्शा कब गरीबों का भला करेंगे। करेंगे भी कि नहीं करेंगे। क्या वाकई सरकारी योजना में ये ई-रिक्शा गरीबों को सस्ते में पड़ रहा है कि नहीं। इन सब की जांच पड़ताल किए बिना आयोजन करा दिया गया और वो ई-रिक्शे आज तक धूल फांक रहे हैं, नोएडा के उसी मैदान में खड़े होकर। इस इंतजार में कि कब किसी गरीब के घर की रोजी-रोटी का सहारा बनेंगे।


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