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संघ प्रमुख की सीएए विरोधियों को दी नसीहत

संघ प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों उत्तर प्रदेश के गोरखुपर में है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर संघ प्रमुख ने गोरखपुर के बिलन्दपुर खत्ता स्थित नगर निगम मैदान में तिरंगा फहराया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्र गान के बाद भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर उन्‍होंने कहा कि 'संविधान ने देश के हर नागरिक को राजा बनाया है।

Mohan Bhagwat

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (26 जनवरी): संघ प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों उत्तर प्रदेश के गोरखुपर में है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर संघ प्रमुख ने गोरखपुर के बिलन्दपुर खत्ता स्थित नगर निगम मैदान में तिरंगा फहराया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्र गान के बाद भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर उन्‍होंने कहा कि 'संविधान ने देश के हर नागरिक को राजा बनाया है। राजा के पास अधिकार हैं लेकिन अधिकारों के साथ सब अपने कर्तव्य और अनुशासन का भी पालन करें। तभी देश को स्वतंत्र कराने वाले क्रांतिकारियों के सपनों के अनुरूप भारत का निर्माण होगा।' 

सर संघचालक मोहन भागवत ने गणतंत्र दिवस के मौके पर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध कर रहे लोगों को इशारों ही इशारों में नसीहत दे डाली। उन्‍होंने कहा कि संविधान ने देश के हर नागरिक को राजा बनाया है। राजा के पास अधिकार हैं लेकिन अधिकारों के साथ सब अपने कर्तव्य और अनुशासन का भी पालन करें। संघ प्रमुख ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को देश के स्वतंत्र होने के बाद देश के तपस्वी और विद्वान नेताओं ने भारत को उसके अनरूप तंत्र देने के लिए संविधान बनाया। 26 जनवरी 1950 को इसे लागू कर तय कर दिया गया कि भारत चलेगा तो अपने तंत्र से चलेगा। 

अपने भाषण के दौरान मोहन भागवत ने राष्ट्रध्वज के तीनों रंगों का महत्व समझाया। संघ प्रमुख ने कहा कि ये रंग ज्ञान, कर्म, भक्ति का कर्तव्य बताने वाले हैं। सबसे ऊपर भगवा रंग त्याग का, बीच का सफेद रंग पवित्रता और हरा रंग मां लक्ष्मी यानी समृद्धि का प्रतीक है। उन्होंने तिरंगे में केसरिया रंग को श्रेष्ठता का प्रतीक बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि केसरिया त्याग का रंग है। यह रंग हमें भारत को निरंतर प्रकाश में बनाये रखने की प्रेरणा देता रहता है। तिरंगे के सफेद रंग को उन्होंने शुद्धता, पवित्रता और ज्ञान का प्रतीक बताया। राष्ट्रीय ध्वज के हरे रंग को उन्होंने समृद्धि का प्रतीक बताया। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि देश हमें बहुत कुछ देता है, लेकिन हम देश को क्या दे सकते हैं इसपर हमें विचार करना चाहिए। उन्होंने भगवा रंग देखते ही मन में सम्मान पैदा होता है। यह बताता है कि हमारा जीवन स्वार्थ का नहीं परोपकार का है। हमें कमाना है दीन दुखियों, वंचितों को देने के लिए। इतना देना है कि सबकुछ देने के बाद भी देने की इच्छा रह जाए। पवित्रता और शुद्धता जीवन में ज्ञान, धन और बल के सदुपयोग के लिए जरूरी है।


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