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कबाड़ी वाले की बेटी ने रचा इतिहास, अब ओलिंपिक में लगाएगी निशाना

नई दिल्ली(1 अगस्त): देश की एक और बेटी रियो ओलंपिक में अपना दम दिखाएगी। रोहतक की पूजा का चयन तीरंदाजी के पैरा रिकर्व ग्रुप में हुआ है। एमए लाइब्रेरी करने के बाद एमए अंग्रेजी की पढ़ाई कर रही छात्रा पिछले दो साल से तीरंदाजी कर रही हैं। वह सीनियर पैरा नेशनल चैंपियनशिप आरचरी में गोल्ड जीत चुकी हैं।

कैसे हुआ पूजा का सिलेक्शन...

- यूरोप में जून में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में 5वां स्थान हासिल कर पूजा ने ओलंपिक क्वालीफाई किया।

- इससे पहले वह एथेलेटिक्स (डिस्कस थ्रो) में दो गोल्ड समेत छह पदक जीत चुकी हैं।

- पूजा को शूटिंग का शौक था। इसने उसे तीरंदाज बनाया। हालांकि दो साल पहले तक ऐसा नहीं था। यहां कोच नहीं होने के कारण पूजा एथलेटिक्स का रुख किया।

- घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण आरचरी जैसा महंगा गेम उसके लिए नामुमकिन था।

- कोच संजय सुहाग को उसके शौक का पता लगा तो उसकी मदद की। उसकी एक हजार रुपए मासिक फीस भी माफ कराई।

कचरा बीनकर पूजा के पिता ने किया गुजारा - पूजा के पिता भोलाराम ने बताया कि उन्होंने अपने परिवार का पालन पोषण कचरा बीनकर किया है। कुछ ही समय पहले उन्होंने कबाड़ी का काम शुरू किया।

- भोलाराम ने कहा कि पहले वह अपनी बेटी को खेलने से रोकते थे, लेकिन अब पूजा ने उनका सिर ऊंचा कर दिया। चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी

- पूजा चार बहनों में सबसे बड़ी हैं। तीनों भाई छोटे हैं और पढ़ाई कर रहे हैं। छात्रा के पिता स्क्रैप का काम करते हैं। इससे घर का खर्च चलता है।

- ऐसे में परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। स्पोर्ट्स एथॉरिटी ऑफ इंडिया के नेशनल बॉक्सिंग एकेडमी रोहतक के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर सतीश कुमार सरहदी ने बताया कि शारीरिक रूप से अशक्त होने के बावजूद उसमें खेल के प्रति लगन है।

- उसके परिवार की आर्थिक हालत कमजोर होने के चलते विभाग की ओर से उसे खेल का सामान व अन्य चीजें नि:शुल्क मुहैया कराई जा रही हैं।


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