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भारतीय सेना में सबसे बड़ा सुधार, सेना की मारक क्षमता बढ़ाएगी सरकार

नई दिल्ली ( 30 अगस्त ): भारतीय सेना में सुधार को लागू करने के लिए सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल डी. बी. शेकतकर (सेवानिवृत्त) समिति की सिफारिशों के पहले बैच की 65 सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है, जिसके तहत 57,000 सैन्य कर्मियों की विभिन्न जरूरी कार्यों के लिए दोबारा तैनाती होगी। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली रक्षा मंत्रालय भी संभाल रहे हैं। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला किया गया कि इन सिफारिशों को साल 2019 के अंत तक लागू कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने इस पर मंगलवार को फैसला किया था, जिसे मंत्रिमंडल ने बुधवार को मंजूरी दे दी।  जेटली ने कहा, "यह आजादी के बाद भारतीय सेना में किया गया सबसे बड़ा सुधार है और इसे सेना के परामर्श से लागू किया जाएगा।" उन्होंने कहा, "इसके तहत 57,000 अधिकारियों, जेसीओ और अन्य रैंक के अधिकारियों की फिर से तैनाती की जाएगी।" सरकार ने शेकतकर समिति का गठन सशस्त्र बलों की आक्रामक क्षमता बढ़ाने तथा रक्षा पर होने वाले खर्च के पुर्नसतुलन के तरीके सुझाने के लिए किया था।

सशस्त्र बलों की जंगी क्षमता बढ़ाने और रक्षा खर्चों को नए सिरे से बैलेंस करने के लिए मनोहर पर्रिकर के कार्यकाल में रक्षा मंत्रालय ने लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डीबी शेकतकर की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक कमिटी बनाई थी। कमिटी ने अपनी रिपोर्ट पिछले साल दिसंबर में सौप दी थी। 

रक्षा मंत्रालय ने कमिटी की 99 सिफारिशों को सशस्त्र बलों के पास भेजा, ताकि इन पर अमल की योजना बनाई जा सके। रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने पहले चरण में इनमें से 65 सिफारिशों को मंगलवार को मंजूरी दे दी, ये सिफारिशें भारतीय सेना से जुड़ी हैं। मंत्रालय के इस फैसले की कैबिनेट को जानकारी दी गई। सरकार का मानना है कि इन सिफारिशों को लागू करने के दूरगामी नतीजे होंगे। 


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