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खतरे में थी भारत के सपूत की जिंदगी, तब इंटरनेशनल कोर्ट गया भारत: विदेश मंत्रालय

नई दिल्ली ( 11 मई ): विदेश मंत्रालय ने बुद्धवार को कहा कि भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी कुलभूषण जाधव के मुद्दे पर इंटरनेशनल कोर्ट (आईसीजे) जाने का यह फैसला सावधानी पूर्वक विचार करके लिया गया। मंत्रालय ने कहा कि जाधव को अवैध रूप से पाकिस्तान में हिरासत में रखा गया था, जहां उनका जीवन खतरे में था।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा, 'यह फैसला सावधानीपूर्वक विचार विमर्श करके लिया गया था।' कुलभूषण जाधव के मुद्दे पर आईसीजे में जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने उच्चायोग संपर्क (काउंसलर एक्सेस) के लिए 16 बार अनुरोध किया, लेकिन इसे इंकार कर दिया गया। हमने मौखिक और लिखित में कई बार जाधव मामले में चलाई गई प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन पाकिस्तान की ओर से इस मामले के दस्तावेजों से जुड़ी हमारी मांग पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

उन्होंने कहा कि जाधव के परिवार की ओर से जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की सैन्य अदालत द्वारा जाधव को सुनाई गई मौत की सजा के खिलाफ अपील की स्थिति के बारे में भी कोई सूचना नहीं दी गई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एक सवाल का जवाब दे रहे थे जिसमें पूछा गया था कि भारत इस मामले में इंटरनेशनल कोर्ट में क्यों गया?

बागले ने कहा कि पाकिस्तानी सैन्य अदालत के आदेश के खिलाफ जाधव के परिवार की अपील की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि जाधव मामले में भारत ने सावधानीपूर्वक चर्चा के बाद आईसीजे जाने का फैसला किया, क्योंकि वह अवैध रूप से पाकिस्तानी हिरासत में हैं और भारत के एक सपूत की जिंदगी खतरे में थी जिन्हें अपहृत कर वहां लाया गया है। उन्हें निष्पक्ष जांच का मौका भी नहीं दिया जा रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि विदेश मंत्री सुषमा ने 27 अप्रैल को पाकिस्तान के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज को एक खत लिखकर अनुरोध किया था कि जाधव के परिवार को वीजा दिया जाए, लेकिन उनके परिवार को अभी तक वीजा नहीं दिया गया।

जाधव (46) को पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत द्वारा पिछले महीने मौत की सजा सुनाई गई थी। भारत ने आईसीजे में अपनी अपील में कहा कि पाकिस्तान ने राजनयिक संबंधों पर विएना संधि का घोर उल्लंघन किया है। भारत ने कहा कि जाधव का ईरान से अपहरण किया गया था, जहां वह भारतीय नौसेना से सेवानिवृत होने के बाद व्यापार कर रहा था, लेकिन पाकिस्तान ने उसे तीन मार्च 2016 को बलूचिस्तान से गिरफ्तार करने का दावा किया।


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