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भगवान का जमीन बेच रहा था पुजारी, हुआ गिरफ्तार

रांची (13 अगस्त): रांची में फर्जीवाड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां राम-जानकी तपोवन मंदिर के पुजारी ने अधिकारियों की सांठगांठ से मंदिर के करोड़ों की जमीन बेच दी। फिलहाल CBI पूरे मामले की जांच में जुटी है। CBI ने भगवान राम की जमीन को गलत तरीके से बेचने, बुनकरों के हक के 9 करोड़ रुपयों से अधिक के गबन और बैंक को 17 करोड़ से अधिक का चूना लगाने के मामले में तीन अलग-अलग FIR दर्ज किए हैं।

इस मामले में CBI ने मंदिर के पुजारी महंत रामशरण दास, आरआरडीए के अज्ञात अधिकारियों व अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। वहीं, ACB ने ही दर्ज दूसरी प्राथमिकी में छोटानागपुर रीजनल हेंडलूम वीवर्स कॉपरेटिव यूनियन लिमिटेड के चेयरमैन मो मंसूर अहमद अंसारी, निदेशक सैयद अहमद अंसारी और उनके परिजनों को आरोपी बनाया गया है। तीसरी प्राथमिकी EOW विंग ने दर्ज की है। इस मामले में केनरा बैंक के बर्खास्त ब्रांच मैनेजर केशव कुमार, हरिओम कंस्ट्रक्शन, चांदी इंटरप्राइजेज और केआर ऑटोमोबाइल्स के पार्टनर पर दर्ज किया गया है। 

राम-जानकी तपोवन मंदिर ट्रस्ट और उसकी परिसंपत्तियों की रजिस्ट्री डीड में हेरफेर कर बिक्री कर दी गई थी। इस मामले में आतीश कुमार सिंह ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। झारखंड हाईकोर्ट ने 7 जून को  CBI जांच का आदेश दिया था।  CBI-ACB में दर्ज FIR में जिक्र है कि 20 सितंबर 2005 को ट्रस्ट की रजिस्ट्री डीड में गलत मंशा से फेरबदल किया गया। इसके बाद ट्रस्ट की करोड़ों की जमीन को कंवर्जन पर ट्रांसफर कर अपार्टमेंट व ऊंची इमारतें बना दी गई। 

डीड में महंत रामशरण दास ने फेरबदल किया। ट्रस्ट का गठन 24 फरवरी 1948 को किया गया था। तब इसके संस्थापक महंत जानकी शरण थे। डीड में पहली बार 1987 और दूसरी बार 2005 में फेरबदल किया गया था। 2005 में फेरबदल किए जाने के बाद डीड में जमीन के ट्रांसफर और कंवर्जन पर देने का क्लॉज जोड़ा गया। तब महंत रामशरण दास ने खूद को गलत तरीके से ट्रस्ट का संस्थापक बताया था।   


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