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रामनाथ कोविंद का गरीबी में बीता बचपन, 6 किमी पैदल चलकर जाते थे स्कूल

नई दिल्ली (20 जुलाई): देश के 14वें राष्ट्रपति के नाम की घोषणा हो गई है और रामनाथ कोविंद देश के अगले राष्ट्रपति होंगे। इसके पहले वे बिहार के राज्यपाल थे। रामनाथ कोविंद के राजनीतिक सफर में कई मोड़ आए। उन्होंने एक समाज सेवी, एक वकील और एक राज्यसभा सांसद के तौर पर काम किया। लेकिन हम उनकी पिछली पृष्टभूमि को देखें तो वे एक बहुत ही साधारण इंसान थे।

कोविंद का जन्म 1 अक्टूबर 1945 को कानपुर के डेरापुर गांव में हुआ था। उनका जन्म एक बहुत ही साधारण परिवार में हुआ। उस वक्त देश अंग्रेजों का गुलाम था। उस समय दलित होना किसी अपराध से कम न था। कोविंद का बचपन गरीबी में गुजरा, पर इन सभी मुसीबतों को पार करते हुए कोविंद आज उस मुकाम पर खड़े हैं, जहां उनकी कलम से हिंदुस्तान की तकदीर लिखी जाएगी। उनका गांव भी खुद को इतिहास के पन्नों में देख रहा है।

रामनाथ कोविंद ने विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार को पीछे छोड़ते हुए बड़े अंतर से जीत हासिल की है। रामनाथ कोविंद को कुल वोट 10,98903 में से 702044 मिले हैं जबकि मीरा कुमार को 367314 वोट मिले। राष्ट्रपति बनने के लिए कोविंद को 5,52,243 वोट चाहिए थे।

इससे पहले भी वो अपनी राह में आने वाले तमाम विरोधियों को पीछे छोड़ चुके हैं। सबसे पहले तो कोविंद ने अपने गांव की इस गरीबी को पछाड़ा। बता दें कि गरीबी की वजह से बचपन में रामनाथ कोविंद 6 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाते थे और फिर पैदल ही 6 किलोमीटर वापस घर लौटते थे।

गरीब परिवार में पैदा हुए रामनाथ कोविंद आगे चलकर एक नामी वकील हुए। बिहार के राज्यपाल भी बने, लेकिन जायदाद के नाम पर उनके पास आज भी कुछ नहीं है। एक घर था वो भी गांववालों को दान कर दिया है। 


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