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19 साल की उम्र में ही है इस शख्स के पास है अरबों की संपत्ति

जयपुर(15 जुलाई): सवाई पद्मनाभ सिंह इन दिनों अंतरराष्ट्रीय पोलो की दुनिया में नाम कमाने में लगे हैं। जयपुर का ये महाराजा हाल में लंदन के हेनले में आयोजित दुनिया के प्रतिष्ठित ब्रिटिश पोलो डे के मैच में उन्होंने हिस्सा लिया। 12 जुलाई को उन्होंने 19वां बर्थडे मनाया।

- पद्मनाभ सिंह की यह मंशा है कि पढ़ाई के बाद वे राजनीति में आकर देश की सेवा करेंगे, क्योंकि लोग राजपरिवार की तरफ उम्मीदों से देखते हैं। स्व. भवानी सिंह के बेटे के रूप में पद्मनाभ को 18 साल की उम्र पाने के साथ ही सभी मामलों में उत्तराधिकारी होने के कानूनी अधिकार मिलेंगे। साथ ही भवानी सिंह के नाम से जुड़ी सभी अदालती कार्रवाइयां पद्मनाभ सिंह के नाम से लड़ी जाएंगी। इसके अलावा बैंकों के खातों का लेन-देन व अन्य कार्य भी पद्मनाभ के नाम से होगा।

- जयपुर के पूर्व महाराजा ब्रिगेडियर भवानी सिंह के निधन के बाद 2011 में उनके उत्तराधिकारी के रूप में सवाई पद्मनाभ सिंह का राजतिलक हुआ। उस समय पद्मनाभ की उम्र महज 12 साल थी। पद्मनाभ जयपुर के पूर्व राजघराने के अब तक के सबसे छोटे प्रमुख बने।

- आजादी के बाद रजवाड़ों को खत्म कर दिया गया, पर अब भी पूर्व राज परिवारों में राजतिलक कर उत्तराधिकार हस्तांतरित किया जाता है। अप्रैल 2011 में दीया कुमारी के बड़े बेटे पद्मनाभ सिंह का जयपुर के राजघराने में पूरे शाही ठाठ के साथ राजतिलक किया गया। दरअसल भवानी सिंह का कोई बेटा नहीं था, उन्होंने 2002 में एकमात्र संतान दीया कुमारी के बड़े बेटे पद्मनाभ सिंह को गोद लिया था।

- भवानी सिंह के पिता सवाई मानसिंह द्वितीय की जो भी संपत्ति थी, मानसिंह के बाद भवानी सिंह उसके उत्तराधिकारी बने। तब से 1986 तक सब कुछ ठीक-ठाक रहा, उसके बाद संपूर्ण संपत्ति के बंटवारे को लेकर पूर्व राजमाता गायत्री देवी, भवानी सिंह के भाई जयसिंह, पृथ्वी सिंह और जगतसिंह एक ओर आ गए। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में संपत्ति बंटवारे का दावा कर दिया। तब से अब तक राजपरिवार की काफी संपत्तियों पर केस चल रहे हैं।


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