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नोट बदलवाने के लिए अमेरिका से भारत आए थे राजन

नई दिल्ली(8 सितंबर): रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने नोटबंदी को लेकर बड़ा बयान दिया है। राजन ने कहा कि उन्हें केंद्र सरकार के नोटबंदी के कदम की कोई जानकारी नहीं थी और यही कारण है कि उन्हें तो खुद नोट बदलवाने के लिए अमेरिका से भारत वापस आना पड़ा था।

- एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि वे कभी भी नोटबंदी के पक्ष में नहीं रहे क्योंकि उनका मानना था कि नोटबंदी की तात्कालिक लागत इसके दीर्घकालिक फायदों पर भारी पड़ेगी।

- गौरतलब है कि गवर्नर पद पर राजन का तीन साल का कार्यकाल चार सितंबर 2016 को पूरा हो गया। सरकार ने आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा की जिसके तहत 500 व 1000 रुपये के मौजूदा नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया। 

- राजन ने कहा कि जीडीपी वृद्धि को बल देने के लिए भारत को तीन क्षेत्रों बुनियादी ढांचा, बिजली व निर्यात पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

- राजन ने कहा कि नोटबंदी की वजह से जीडीपी में 1-2 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। आरबीआई को नोटबंदी का भार झेलना पड़ा। नए नोट प्रिंट करने का भार इस योजनाओं के फायदे पर भारी पड़ा।

- उन्होंने कहा कि अगर जेपी मॉर्गन जैसी संस्थाओं के आंकलन पर भरोसा करें तो नोटबंदी की वजह से 1-2 प्रतिशत जीडीपी के बराबर नुकसान हुआ है, जो कि लगभग 2 लाख करोड़ के आसपास है। वहीं फायदे की बात करें तो टैक्स से सि‍र्फ लगभग 10 हजार करोड़ की आमदनी हुई।


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