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सीएए के खिलाफ पंजाब सरकार ने विधानसभा में प्रस्ताव को दी मंजूरी, बना दूसरा राज्य

मोदी सरकार (Narendra Modi Government) द्वारा बनाये गए नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के विरोध में देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन (Protest) देखने को मिल था। लोगों ने सड़कों पर उतरकर उपद्रव भी मचाया था। केरल सरकार (Kerla Government)

Amrinder Singh, अमरिंदर सिंह

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(17 जनवरी): मोदी सरकार (Narendra Modi Government) द्वारा बनाये गए नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के विरोध में देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन (Protest) देखने को मिल था। लोगों ने सड़कों पर उतरकर उपद्रव भी मचाया था। केरल सरकार (Kerla Government) के बाद नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के खिलाफ अब पंजाब सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पंजाब विधानसभा में भी नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। सीएए को निरस्त करने के संबंध में विधानसभा में पेश किए गए प्रस्ताव को विधानसभा में ध्वनिमत से पारित किया गया। मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा ने विधानसभा के दो दिवसीय विशेष सत्र के दूसरे दिन इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। पंजाब की कांग्रेस सरकार ने इस कानून को विभाजनकारी और देश के संवैधानिक ढांचे के खिलाफ बताया है।

ब्रह्म मोहिंद्रा ने इस प्रस्ताव को पढ़ते हुए कहा, ‘संसद की ओर से पारित सीएए के चलते देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और इससे लोगों में काफी गुस्सा है। इससे सामाजिक अशांति पैदा हुई है। इस कानून के खिलाफ पंजाब में भी विरोध प्रदर्शन हुए जोकि शांतिपूर्ण थे और इसमें समाज के सभी तबके के लोगों ने हिस्सा लिया था।’ इस प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने के बाद सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, 'हमने एक ड्राफ्ट केंद्र सरकार को भेजा है, जिसमें कुछ बदलावों की बात की गई है। इन बदलावों के बाद सीएए सबको मंजूर हो सकता है। जनगणना अभी हो रहा है और यह पहले जैसी ही होगी। हर किसी की गिनती होगी, चाहे वह मुस्लिम हो, हिंदू हो, सिख हो, ईसाई हो या कोई और।

केरल के बाद दूसरा राज्य बना पंजाब

बता दें कि केरल के बाद पंजाब दूसरा राज्य है, जहां सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया है। प्रस्ताव में कहा गया कि नागरिकता पर संशोधित कानून धर्मनिरपेक्षता के उस ताने-बाने को नकारता है, जिस पर भारत का संविधान आधारित है। इसमें कहा गया, 'यह विभाजनकारी है और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष लोकतंत्र के विरुद्ध है, जिसमें प्रत्येक के लिए समानता की बात निहित है। नागरिकता देने में धर्म आधारित भेदभाव के अलावा, ऐसा भी संदेह है कि सीएए हमारे कुछ लोगों की भाषाई एवं सांस्कृतिक पहचान के लिए भी खतरा है। सीएए विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों (ओसीआई) के कानून के किसी तरह का उल्लंघन करने पर उनके ओसीआई कार्ड के पंजीकरण को रद्द करने की भी बात करता है।


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