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दलित लड़कियों को मंदिर में जाने से रोका, 3 पर केस दर्ज

वड़ोदरा (10 जुलाई): भले ही हमें आजाद हुए 70 साल हो गए हो, लेकिन हम अभी भी मानसिक गुलामी के शिकार बने हुए है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि गुजरात के गोधरा में मंदिर के दो पुजारियों समेत तीन लोगों ने दलित लड़कियों को मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया।

मामला गोधरा के पास मोहलोल गांव के एक मंदिर का है, जहां पर लड़कियां गौरी-व्रत की पूजा करने के लिए जाना चाहती थीं, लेकिन दलित समुदाय से होने के चलते पुजारियों ने उन्हें एंट्री देने से मना कर दिया। लड़कियों ने आरोप लगाया कि मंदिर के पुजारी ने वहां उन्हें पूजा करने से भी रोका, क्योंकि वह दलित समाज से हैं।

यह मामला शनिवार को उस वक्त सामने आया, जब मंदिर के पुजारी बाबू भट्ट ने लड़की को मंदिर से बाहर धक्का दे दिया। लड़कियों के पिता गोपाल मोची ने अपनी ओर से दर्ज शिकायत में पुलिस को बताया कि व्रत की शुरुआत से ही पुजारी उन्हें मंदिर में नहीं जाने दे रहा था, क्योंकि वे वाल्मीकि समुदाय से हैं।

मोची ने कहा कि हम लोग उस मंदिर में नहीं जाते हैं क्योंकि हमारे समुदाय का दूसरा मंदिर है, लेकिन उसके बंद होने के चलते लड़कियां उस मंदिर में चली गई थीं। जब मामला बातचीत से नहीं निपटा, तब मोची ने पुलिस में धमकी और एससी-एसटी ऐक्ट के तहत केस दर्ज कराया। मोची ने पुजारी, उसके बेटे और एक अन्य व्यक्ति मधु मेहता के खिलाफ केस दर्ज कराया।


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