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पेट पालने के लिए 12 किलोमीटर तक खींची बैलगाड़ी !

नई दिल्ली (6 जनवरी): मध्य प्रदेशस के गुना में  बैल की बेवक्त मौत की वजह से एक गरीब को बैलगाड़ी में खुद जुतना पड़ा, ताकि उसका परिवार भूखा न रहे। उसने 12 किलोमीटर गाड़ी खींची। इस दौरान उसकी पत्नी अपने डेढ़ साल के बेटे को साड़ी में कंधे में लटकाकर गाड़ी में धक्का लगाती रही। मामला मध्य प्रदेश में गुना जिले के जामनेर का है।- राघौगढ़ जिले के खिलचीपुर में मोहन बंजारा रहता है। वह घरों में इस्तेमाल होने वाले चाकू-छुरी बेंचकर अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करता है।- इसके लिए उसे बैलगाड़ी से कई-कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।- उसका एक बैल कुछ दिन से बीमार था। मोहन ऐसी दुविधा में था कि वह बैल का इलाज कराए या फिर उसे गाड़ी में जोतकर सामान बेचने जाए।- इस गरीब के पास जितनी जमा पूंजी थी वह बैल के इलाज में लगा चुका था, फिर भी वह ठीक नहीं हुआ।- मोहन गुरुवार को अपनी बैलगाड़ी से सामान बेचने गुना जिले के जामनेर जा रहा था, तभी रास्ते में उसके बैल ने दम तोड़ दिया।- रात काफी हो चुकी थी। पत्नी राधोबाई और डेढ़ साल के बेटे पप्पू के साथ मोहन को समझ नहीं आया कि वह सड़क पर रात कैसे गुजारे। न जाए तो सुबह खाने का इंतजाम होना मुश्किल था।- ऐसे में मोहन ने नम आंखों से अपने मरे बैल को वहीं दफ्न किया और बैलगाड़ी में दूसरे बैल के साथ खुद ही जुतने का फैसला किया।- उसने पत्नी को बैलगाड़ी में बैठने को कहा, लेकिन उसे यह बात मंजूर नहीं थी कि पति गाड़ी अकेले खींचे।- ऐसे में उसने अपने बेटे को साड़ी के पल्लू की झोली बनाकर उसमें कंधे से लटकाया और खुद भी गाड़ी में धक्का लगाने लगी।- दोनों ने मिलकर 12 किलोमीटर तक गाड़ी खींची और जामनेर पहुंच गए।


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