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गंभीर अपराध के आरोपी नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक लगे: SC से बोला चुनाव आयोग

नई दिल्ली(11 फरवरी): चुनाव आयोग ने गंभीर अपराध के आरोपी नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का समर्थन किया है। चुनाव आयोग चाहता है कि अगर किसी नेता पर किसी ऐसे अपराध के आरोप हों जिनमें 5 साल तक की सजा मुमकिन हो, तो उस नेता के चुनाव लड़ने पर रोक लगे बशर्ते कि चुनाव से कम से कम 6 महीने पहले केस दर्ज हुआ हो।

- चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह केंद्र सरकार को कानून में सुधार का निर्देश दे। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने ऐफिडेविट में कहा है कि रेप्रिजेंटेशन ऑफ द पीपल ऐक्ट में सुधार होना चाहिए ताकि गंभीर अपराधों के मामले में मुकदमों का सामना करने वाले नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक लग सके। राजनीतिक विरोधियों द्वारा द्वेषपूर्ण कार्रवाई को रोकने के मकसद से 6 महीने वाली शर्त की बात की गई है। 

- पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र की कमी से चिंतित आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि संसद को कानून में सुधार करना चाहिए और पार्टियों के भीतर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए गाइडलाइंस बनाने चाहिए। 

- ऐडवोकेट अमित शर्मा की तरफ से फाइल किए गए ऐफिडेविट में कहा गया है, 'आयोग ने कानून में सुधार का प्रस्ताव दिया है ताकि कोई भी व्यक्ति जो 5 साल या उससे अधिक सजा वाले अपराध का आरोपी है तो उसे चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य कर दिया जाए, भले ही मुकदमा लंबित हो। हालांकि जरूरी है कि सक्षम अदालत उसके खिलाफ आरोप तय कर चुकी हो।' ऐफिडेविट में कहा गया है कि ऐसे कदमों से राजनीति को स्वच्छ करने और आपराधिक तत्वों के प्रभाव से मुक्त करने में मदद मिलेगी। 

- चुनाव आयोग ने कहा कि उसने कानून में संशोधन के लिए 2004 में केंद्र सरकार से सिफारिश की थी लेकिन अब तक उसपर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वर्तमान कानून के तहत सिर्फ उन सजायाफ्ता नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक है जिन्हें कम से कम 2 साल जेल की सजा हुई हो। 


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