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पर्सनल, होम और कार लोन की मांग में आई कमी, यह है वजह

नई दिल्ली ( 22 दिसंबर ): नोटबंदी के बाद से ही देश में लोगों के सामने कैश की किल्लत खड़ी हो गई है। ऐसे होम और कार लोन की मांग में भी कमी आई है।  सिस्टम में कैश की कमी होने से क्रेडिट कार्ड्स की डिमांड को बढ़ावा मिला है लेकिन कंजम्पशन के वास्ते लिए जाने वाले लोन में सुस्ती आ रही है। लोग खरीदारी और कंजम्पशन प्लान टाल रहे हैं। बैंक ज्यादा स्टाफ करंसी मैनेजमेंट और कस्टमर्स की कैश की डिमांड पूरी करने में लगा रहे हैं। इसलिए उनका फोकस लोन बांटने पर कम रह गया है।

दरअसल, जिन सेक्टरों में ज्यादा पेमेंट कैश में होता था, कैश की कमी के चलते लोग उनमें खर्च टालने पर मजबूर हो गए हैं।'पर्सनल लोन के साथ एक और सेगमेंट है जिसमें स्लोडाउन दिख रहा है। एक वेबसाइट के मुताबिक हाउजिंग और ऑटोमोबाइल सेगमेंट की डिमांड में भी कमी आई है। इस पोर्टल के जरिए लोग कई बैंकों और एनबीएफसी के फाइनैंशल प्रॉडक्ट्स के लिए अप्लाई कर सकते हैं। बैंक बाजार के फाउंडर ए शेट्टी के मुताबिक काला धन के खिलाफ सरकारी अभियान की वजह से लोगों को प्रॉपर्टी प्राइस में गिरावट आने की उम्मीद बंधी है। इसलिए उन्होंने मकानों की खरीदारी टाल दी। शेट्टी ने कहा, 'कार या मकान के डाउनपेमेंट के लिए कैश की कमी भी लोगों को ऐसे लोन प्रॉडक्ट्स के बारे में पड़ताल करने से रोक रही है।'

हालांकि, इस बीच हर बैंक के क्रेडिट कार्ड प्रॉडक्ट्स की डिमांड में जोरदार बढ़ोतरी हुई है। शेट्टी ने कहा, 'हमें पिछले महीने लगभग 1.2 करोड़ विजिटर्स मिले, जिनकी संख्या आमतौर पर 90 लाख रहती थी। इसमें भी ज्यादातर डिमांड क्रेडिट कार्ड्स के लिए आई थी।' ऐसे में एक तरफ जहां पर्सनल कंजम्पशन पर सीधी मार पड़ी है, वहीं दूसरी ओर बैंक भी ऐसे छोटे और मझोले उद्यमों को लोन बांटने में सुस्ती दिखाने लगे हैं जिनका अधिकांश कारोबार कैश में होता है। बैंकों का मानना है कि ऐसे उद्यमों को कैश फ्लो में कमी महसूस हो रही होगी और उनको रीपेमेंट में दिक्कत आ सकती है।


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