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AOL: 165 देशों के कलाकारों को देखने के लिए जुटेंगे लगभग 35 लाख लोग

नई दिल्ली (9 मार्च): 48 घंटे बाद विश्व देखेगा दुनिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक मेला जो हिंदुस्तान के दिल दिल्ली में यमुना किनारे लगने जा रहा है। इसमें 165 देशों के कलाकार हिस्सा लेंगे। शांति और मेडिटेशन के इस कार्यक्रम में करीब 35 लाख लोग जमा होंगे। इनकी मेहमान नवाज़ी के लिए दुनिया का सबसे बड़ा पंडाल तैयार है। ये कहें कि यमुना किनारे पूरा शहर बसाया गया है तो गलत नहीं होगा।

कुछ देर पहले इस एनजीटी की तरफ से कार्यक्रम की परमीशन मिल गई है। लेकिन आज सुबह यमुना किनारे श्री श्री रविशंकर के संसकृतिक कार्यक्रम का विवाद आज सड़क से संसद तक पहुंच गया। कार्यक्रम में सेना के इस्तेमाल को लेकर संसद में विपक्ष ने सरकार को जमकर घेरा।

सुबह राज्य सभा खुली तो इसकी शुरुआत सांसकृतिक प्रोग्राम पर सियासत का पारा चढ़ने के साथ हुई। विपक्ष सांसदों ने सवाल खड़ा किया आखिर यमुना किनारे कैसे इजाज़त मिली ? किसने इस कार्यक्रम की परमीशन दी ? सेना को कार्यक्रम के लिए पंटून पुल बनाने का इस्तेमाल क्यों ?

पंडाल तक पहुंचने के लिए सेना यमुना पर बिना कंक्रीट इस्तेमाल वाला पुल बना रही है। बता दें कि अब तक सेना एक पुल बना चुकी है और दूसरा पुल बनाने का काम चल रहा है। खबरों के मुताबिक सेना तीसरा पुल भी बना सकती है। 

उधर ट्वीट कर श्री श्री रविशंकर ने इस पर सिय़ासत ना करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मैं सभी पार्टियों से अपील करता हूं कि #WCF2016 पर राजनीति न करें। यह सभी कल्चर, देश, धर्म और आइडियोलॉजी एक साथ लाने का काम करेगा। तो सभी साथ आएं।'

यमुना बैंक के करीब 1000 एकड़ एरिया को अस्थायी गांव के तौर पर तैयार किया गया है, जहां योगा, मेडिटेशन, शांति प्रार्थनाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। ये कार्यक्रम तीन दिन का होगा। दावा किया जा रहा है कि इस फेस्टिवल में दुनियाभर से पैंतीस लाख लोग जमा होंगे। लेकिन उससे पहले ही ये फिस्टिवल विवादों में आ गया।


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