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कश्मीर में आतंक फैलाने के लिए पुरानी रणनीति पर लौट रहा पाकिस्तान!

नई दिल्ली(20 मई): कश्मीर में स्थानीय आतंकवादियों और अलगाववादियों के बीच बढ़ते मतभेदों के बीच खुफिया एजेंसियों को यह शक हो रहा है कि सीमा पार बैठे आतंक के सरगना घाटी में किसी नए आतंकवादी संगठन को ऐक्टिव करने की प्लानिंग कर रहे हैं, जिनका फोकस हिज्बुल मुजाहिदीन के पूर्व कमांडर जाकिर मूसा पर होगा।

- खुफिया सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ सप्ताह से सामने आ रहे बयान और सोशल मीडिया पर दिख रही तस्वीरें इसी ओर इशारा कर रहे हैं। बीते कुछ दिनों में आतंकी बुरहान वानी के उत्तराधिकारी जाकिर मूसा के बयान और कश्मीरी अलगाववादियों एवं यूनाइटेड जिहाद काउंसिल के चीफ सैयद सलाहुद्दीन की प्रतिक्रिया के साथ ही सोशल मीडिया में घूम रही तस्वीरें, वीडियो-ऑडियो क्लिप्स इस बात का संकेत हैं कि कश्मीर में आतंक फैलाने वालों के बीच गहरे मतभेद उभर आए हैं।

- एक अंग्रेजी अखबार ने खुफिया सूत्रों के हवाले से छापा कि इन हालात में हो सकता है कि पाकिस्तान एक बार फिर कश्मीर के लिए 1990 के दशक वाली रणनीति अपना रहा हो, जब इकलौते आतंकी संगठन, जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) की जगह कई नए आतंकी संगठनों ने ले ली थी। याद रहे कि 1993-94 तक कई आतंकी संगठन अस्तित्व में आ गए थे।

- एक अधिकारी ने कहा, 'पाकिस्तान द्वारा कश्मीर में एक नए आतंकी संगठन को प्रोत्साहित किए जाने की आशंका काफी मजबूत नजर आ रही है। मूसा अलगाववादियों, हिज्बुल और यहां तक कि पाकिस्तान के खिलाफ भी बोल रहा है। उसका फोकस कश्मीरी युवाओं पर है। वह कश्मीर की आजादी के लिए इस्लामिक उदय की वकालत कर रहा है।'

- एक खुफिया सूत्र ने बताया, 'भारत को शक है कि पाकिस्तान की एजेंसियां कश्मीर के संघर्ष को अब 'आजादी के लिए इस्लामिक उदय' की तरह पेश करना चाहती हैं। बुरहान वानी की हत्या के 10 महीने बाद अब पाकिस्तान का फोकस अब मूसा पर है।'


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