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पाक के पूर्व न्यूक्लियर साइंटिस्ट ने किया खुलासा, 5 मिनट में निशाना बन जाती दिल्ली

नई दिल्ली(29 मई): पाकिस्तान के पूर्व साइंटिस्ट डॉक्टर अब्दुल कादिर खान ने शनिवार को कहा है कि उनका देश रावलपिंडी के नजदीक कहूटा से दिल्ली को सिर्फ पांच मिनट में टारगेट कर सकता था। खान जिनपर इराक, सीरिया और नॉर्थ कोरिया को न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी बेचने का आरोप है एक प्रोग्राम में कहा कि 1984 में पाकिस्तान एक न्यूक्लियर टेस्ट कर सकता था लेकिन सरकार की मंजूरी न मिलने की वजह से इसे टालना पड़ा। 

खान पाकिस्तान के न्यूक्लियर ताकत बनने के मौके पर ऑर्गनाइज की गई एक रैली में बोल रहे थे। इस रैली को ‘यौम-ए-तकबीर’ नाम दिया गया था।  खान ने एक और खुलासा किया। उन्होंने कहा कि हम 1984 में एक न्यूक्लियर बम टेस्ट करना चाहते थे। लेकिन तब के प्रेसिडेंट जनरल जिया उल हक ने इसकी इजाजत नहीं दी। 

खान के मुताबिक, जनरल जिया ने उनसे कहा कि अगर पाकिस्तान इस तरह का कोई टेस्ट करता है तो उसे मिलने वाली विदेशी मदद बंद हो जाएगी और देश संकट में पड़ जाएगा। खान के मुताबिक, जिया की बात सही भी थी। क्योंकि उस दौर में सोवियत फौजें अफगानिस्तान में जंग लड़ रहीं थीं और पाकिस्तान को अमेरिका की मदद की बदौलत काफी फंड मिल रहा था।

खान ने कहा कि अगर मैं नहीं होता तो पाकिस्तान न्यूक्लियर पॉवर कभी नहीं बन सकता था। उन्होंने कहा कि हमने अपने देश के लिए काफी मेहनत करते हुए उसे आज इस मुकाम पर पहुंचाया है। जनरल मुशर्रफ के दौर का जिक्र करते हुए खान ने कहा कि हमारे देश में न्यूक्लियर साइंटिस्ट्स को वो इज्जत नहीं मिल पाई जिसके वो हकदार थे। 

बता दें कि पाकिस्तान की राजनीति में इन दिनों पनामा पेपर लीक मामले को लेकर बवाल मचा हुआ है। नवाज शरीफ के साथ कई और नेताओं के नाम इसमें सामने आए हैं। एक्यू. खान के नाम भी पनामा पेपर्स लीक में है। खान और उनकी फैमिली की कई विदेशी कंपनियों की जानकारी सामने आई है।  


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