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नवाज शरीफ की किस्मत का फैसला आज, सुप्रीम कोर्ट JIT रिपोर्ट की करेगा जांच

इस्लामाबाद (16 जुलाई): पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही है। पनाम पेपर लीक मामले में आरोपों में घीरे नवाज शरीफ के भविष्य को लेकर आज बड़ा फैसला हो सकता है। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट आज पनामा पेपर केस में ज्वॉइंट इंवेसटिगेशन टीम यानी JIT रिपोर्ट की जांच करेगा। छह सदस्यीय संयुक्त जांच दल ने शरीफ परिवार के व्यापारिक लेन-देन की जांच संबंधी अपनी 10 खंडों वाली रिपोर्ट 10 जुलाई को शीर्ष अदालत को सौंपी थी। उसने सिफारिश की कि शरीफ और उनके बेटे हसन नवाज और हुसैन नवाज के साथ-साथ उनकी बेटी मरियम नवाज के खिलाफ राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो अध्यादेश, 1999 के तहत भ्रष्टाचार का एक मामला दर्ज किया जाना चाहिये।

वहीं पीएम शरीफ पर लगे आरोपों की जांच कर रही JIT ने 15 मामलों को फिर से खोलने की सिफारिश की है। इसमें 5 केस पर फैसला लाहौर हाई कोर्ट पहले ही सुना चुकी है जबकि 8 में पाक पीएम के खिलाफ जांच और 2 में पूछताछ हुई है। अखबार 'द डॉन' के मुताबिक इन 15 केसों में 3 1994 से 2011 के बीच के PPP के कार्यकाल के हैं जबकि 12 मामले जनरल परवेज मुशर्रफ के समय के हैं जब शरीफ का तख्तापलट कर जनरल ने अक्टूबर 1999 में कमान संभाल ली थी। इनमें शरीफ परिवार से जुड़ा 18 साल पुराना लंदन में प्रॉपर्टी मामला भी शामिल है। इसकी शुरुआत पाकिस्तान की नेशनल एकॉउंटबिलिटी ब्यूरो यानी NAB ने की थी। इसी साल अप्रैल में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने JIT को लंदन में फ्लैट से जुड़े मामले की जांच करने को कहा था।

 JIT की रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से कई मामलों की विस्तृत जांच के बिना ही उसे बंद कर दिया गया। शरीफ परिवार पर धन जुटाने के मामले में JIT ने कहा है कि आरोपियों के खिलाफ कई सबूत मौजूद हैं। JIT ने साथ ही कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को एनएबी से फिर से लंदन प्रोपर्टी के जांच का निर्देश देना चाहिए।  JIT ने 1990 के दशक के उन मामलों की जांच की भी अनुशंसा की है जिसमें उन पर फेडरन इंवेस्टीगेशन एजेंसी यानी FIA गलत तरीके 42 लोगों की नियुक्तियों का आरोप है।

सभी बड़े राजनीतिक दलों ने उनसे इस्तीफे की मांग की है और उन पर लगे आरोप गलत साबित होने तक उन्हें सत्ता से दूर रहने को कहा है। शरीफ इसके लिए राजी नहीं हैं और उनकी बेटी मरियम ने एक ट्वीट में इसकी पुष्टि की है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘इंशाअल्लाह वह इस्तीफा नहीं देंगे क्योंकि उनके पांच बार सत्ता में रहने के दौरान उनके खिलाफ सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का एक भी आरोप सही साबित नहीं हुआ है।’ शरीफ रिकॉर्ड तीसरी बार प्रधानमंत्री पद का दायित्व निभा रहे हैं. इससे पहले वह 1980 के दशक में दो बार पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।


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