News

न्यूज़ 24 EXCLUSIVE: एक रैली की कीमत तुम क्या जानों ''वोटर बाबू'', देखें ऑपरेशन रैली

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की चौहद्दियों पर चुनावों ने दस्तक दी और देश की फिज़ा बदलने लगी। आसमान पर हैलिकॉप्टर का शोर बढ़ने लगा और जमीन पर सजने लगे सियासत के बड़े-बड़े शामियाने। किसी को मोटरसाइकिल पर भरोसा है तो कोई कार में सवार जनता जनार्दन को जगाने निकला है। चुनाव में माननीयों को जनता की समझ से ज्यादा चमचमाते चेहरों पर भरोसा है। मंच जम्हूरियत की ताकत की आजमाइश का है लेकिन पर्दे के पीछे पैसे की ऐसे पैमाइश चल रही है जिसमें जनतंत्र के सभी पैमाने पीछे छूट रहे हैं। लोकतंत्र के इस पावन पर्व के पीछे पैसे के खतरनाक खेल का आज आपके सामने होगा पर्दाफाश।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 मार्च):  दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की चौहद्दियों पर चुनावों ने दस्तक दी और देश की फिज़ा बदलने लगी। आसमान पर हैलिकॉप्टर का शोर बढ़ने लगा और जमीन पर सजने लगे सियासत के बड़े-बड़े शामियाने। किसी को मोटरसाइकिल पर भरोसा है तो कोई कार में सवार जनता जनार्दन को जगाने निकला है। चुनाव में माननीयों को जनता की समझ से ज्यादा चमचमाते चेहरों पर भरोसा है। मंच जम्हूरियत की ताकत की आजमाइश का है लेकिन पर्दे के पीछे पैसे की ऐसे पैमाइश चल रही है जिसमें जनतंत्र के सभी पैमाने पीछे छूट रहे हैं। लोकतंत्र के इस पावन पर्व के पीछे पैसे के खतरनाक खेल का आज आपके सामने होगा पर्दाफाश।

अब से कुछ दिनों बाद ही आप लोकतंत्र के सबसे बड़े महापर्व में हिस्सा लेंगे। कुछ दिनों के बाद ही आप जनतंत्र के अपने सबसे बड़े अधिकार यानि वोट डालने के अपने अधिकार का इस्तेमाल भी करेंगे लेकिन उससे पहले आपके लिए ये जानना जरुरी है कि आपके जनप्रतिनिधि आपके एक-एक वोट की क्या कीमत लगा रहे हैं...? न्यूज 24 के इस सबसे बड़े खुलासे ऑपरेशन रैली में हम आपको दिखाएंगे कि क्या है आपके एक वोट की कीमत और कहां से चुनाव से पहले बाजार में बरसने लगा है पैसा...लेकिन सबसे पहले आपको बताते हैं कि क्या है चुनाव प्रचार में एक प्रत्याशी के खर्च करने की सीमा...? और कैसे सभी पार्टियां इसका कर रही हैं खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन ?

कहा जाता है कि जनतंत्र में जनता ही जनार्दन होती है, जनता का मत ही बहुमत होता है और बहुमत ही सत्ता और सरकार का आधार तय करती है। मगर अफसोस आजादी के बाद से ये बातें धीरे-धीरे कागजी और किताबी होकर रह गईं। आज के हालात में सच ये है कि चुनाव में पैसों के पावर से बहुमत के बल को छलने की चाल चली जाती है। रुपए की ताकत से वोट के अधिकार को खरीदने की आजमाइश होती है और वोटर के मन को पैसों की खनक से भरमाने की कोशिश होती है। कौन नहीं जानता कि इन सबकी वजह है चुनावों के दौरान बहने वाला बेहिसाब पैसा।

-चुनाव में एक उम्मीदवार का कितना खर्च ?-एक रैली में कितना खर्च हो जाता है ?-बाजार में कैसे आ गए अरबो-खरबो रुपए ?-नोटबंदी के बाद भी कहां से आए बाजार में रुपए ?-70 लाख से ज्यादा एक रैली पर खर्चा-चुनाव आयोग के नियमों की कैसी उड़ती है धज्जियां ?-आज आपके एक-एक सवाल का मिलेगा जवाब

इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए देखें पूरा वीडियो...


Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 and Download our - News24 Android App . Follow News24online.com on Twitter, YouTube, Instagram, Facebook, Telegram , Google समाचार.

Tags :

Top