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हमेशा रहेंगे याद ओमपुरी के ये डायलॉग

नई दिल्ली ( 6 जनवरी ): दिग्गज अभिनेता ओम पुरी का शुक्रवार सुबह अपने घर में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 66 साल के थे। उनके एक पारिवारिक मित्र ने अभिनेता के निधन की पुष्टि की। वह हिन्दी सिने जगत के साथ-साथ कई हॉलीवुड फिल्मों का भी हिस्सा रहे। उनकी गिनती समानांतर सिनेमा के प्रमुख कलाकारों में की जाती है। कई फिल्मी पुरस्कार हासिल कर चुके ओमपुरी को 'आरोहण' और 'अर्ध सत्य' के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है। ओम पुरी ने अपने फ़िल्मी सफर की शुरुआत मराठी नाटक पर आधारित फिल्म 'घासीराम कोतवाल' से की थी। 

ओमपुरी की मानें तो फिल्म में उनके अच्छे काम के लिए उन्हें मूंगफली का भुगतान किया गया था। ओमपुरी ने अपने करियर में कई सुपरहिट फ़िल्में दी हैं। जहां फिल्मों में उन्हें एक्टिंग के लिए जाना जाता है, वहीं उनके कुछ डायलॉग भी काफी लोकप्रिय हुए हैं।

आवारा पागल दीवाना फिल्म का पहला डायलॉग 'मरने से पहले मेरे बाल डाई कर देना, आई वांट टू डाई यंग। दूसरा डायलॉग अगर मैं मर गया, मैं तुझे जिंदा नहीं छोडूंगा'

फिल्म जाने भी दो यारो का पहला डायलॉग 'द्रौपदी तेरी अकेले की नहीं...हम सब शेयरहोल्डर हैं'। दूसरा डायलॉग 'शराबी तो शराबी की मदद करेगा'

फिल्म मेरे बाप पहले का आप पहला डायलॉग 'सुना है आजकल छोटी-छोटी लड़कियों को हम जैसे बड़े लोग पसंद हैं...मेरे साथ ऐसा पहली बार हो रहा है' दूसरा डायलॉग 'ये बगीचे इतने बड़े क्यों होते हैं, एक फूल-एक फब्बारा...बात ख़त्म...इतने ताम-झाम की क्या ज़रूरत'

फिल्म मरते दम तक का पहला डायलॉग 'हमारे धंधे में आंसू के साथ कोई रिश्ता नहीं होता'। दूसरा डायलॉग 'खून जब खौलता है तो मौत का तांडव होता है'

फिल्म नरसिम्हा पहला डायलॉग 'मुझे कोई नहीं मार सकता...न आगे से, न पीछे से...न दाएं से, न बाएं से...न आदमी, न जानवर...न अस्त्र, न शस्त्र'। दूसरा डायलॉग  'हर जूती यह सोचती है कि वह पगड़ी बन सकती है..मगर जूती की किस्मत है कि उसे पैरों तले रौंदा जाए...और पगड़ी का हक है कि उसे सर पर रखा जाए'।


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