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पानी से भी सस्ता हुआ तेल, फिर भी पेट्रोल 60 रुपए लीटर

 

नई दिल्ली(12 जनवरी): कच्चे तेल की कीमत में लगातार जारी गिरावट के मद्देनजर भारतीय बास्केट में इसकी कीमत एक लीटर मिनरल वाटर से भी नीचे आ सकता था, लेकिन सरकार के उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी के कारण इसका फायदा आम लोगों को नहीं मिल पा रहा है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय बास्केट में कच्चा तेल 2001.28 (30.02 डॉलर प्रति बैरल) रुपए प्रति बैरल पर आ गया। तेल की कीमतें मांग और आपूर्ति में संतुलन न होने के कारण गिरती जा रही हैं। यहां आपको बता दें कि एक बैरल में 158 लीटर तोल होता है। अगर लीटर के संदर्भ में इसकी गणना की जाए तो यह 12.67 रुपए प्रति लीटर का पड़ेगा जो एक लीटर पानी के मूल्य 15 रुपए से भी कम है, लेकिन सरकार के नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच उत्पाद शुल्क में सात बार बढ़ोतरी करने से दिल्ली में पेट्रोल 59.35 रुपए और डीजल 45.03 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का लाभ उठाते हुए राजस्व घाटा कम करने के लिए सरकार ने गत 7 नवंबर से अब तक तीन बार पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाया है। 7 नवंबर को पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 1.60 रुपए तथा डीजल पर 30 पैसे प्रति लीटर बढ़ाया गया था, जबकि 16 दिसंबर को इनमें क्रमश: 30 पैसे तथा 1.17 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। सरकार ने इससे पहले नवंबर 2014 से जनवरी 2015 के बीच भी चार बार में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 7.75 रुपए तथा डीजल पर 6.50 रुपए प्रति लीटर बढ़ाया था। इस प्रकार मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से सात बार में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 11.02 रुपए तथा डीजल पर 9.97 रुपए प्रति लीटर बढ़ चुका है।

 


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