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'भुलाए नहीं जा सकते हिरोशिमा के खामोश आंसू'

नई दिल्ली (27मई): अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जापान के हिरोशिमा की अपनी ऐतिहासिक यात्रा के दौरान विश्व के पहले परमाणु हमले के पीड़ितों को शुक्रवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। ओबामा इस स्थल का दौरा करने वाले अमेरिका के पहले कार्यरत राष्ट्रपति बन गये। उन्होंने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि 71 वर्ष पहले आसमान से मौत गिरी थी और दुनिया बदल गयी थी। ओबामा जब पुष्पांजलि अर्पित कर रहे थे तब वह उदास लग रहे थे। उन्होंने अपना सिर झुकाया हुआ था और पीछे हटने से पहले वह थोड़ा रुके और अपनी आंखें बंद की।

ओबामा ने जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए देखा। उन्होंने कहा कि बम ने यह दिखाया कि मानव जाति के पास स्वयं को नष्ट करने का जरिया है। उन्होंने कहा कि हम इस स्थान हिरोशिमा पर क्यों आये हम उस भयावह ताकत के बारे में मंथन करने आये हैं जो हालिया अतीत में हमारे सामने घटित हुया था। हम मृतकों के प्रति शोक व्यक्त करने के लिए आये हैं। ओबामा ने कहा कि उनकी आत्माएं हमसे बात करती हैं, वे हमसे अपने भीतर झांकने के लिए कहती हैं, यह परखने के लिए कहती हैं कि हम कौन हैं।

 

ओबामा ने कहा कि प्रौद्योगिकी प्रगति मानवीय संस्थानों में बराबर की प्रगति के बिना हमें बर्बाद कर सकती है। वैज्ञानिक क्रांति जिसके चलते परमाणु विखंडन हुआ उसके लिए एक नैतिक क्रांति की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसी कारण से हम शहर के बीचो बीच स्थित इस स्थान पर आये हैं, हम यहां खड़े हुए हैं और स्वयं को उस क्षण को याद करने के लिए मजबूर कर रहे हैं जब बम गिरा था। ओबामा ने कहा कि हम स्वयं को इसके लिए बाध्य कर रहे है कि हम उन बच्चों के भय को महसूस करें जो वे अपने आसपास के मंजर को देखकर घबराये हुए थे। हम उस विलाप की मूक आवाज सुन रहे हैं।


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