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अब सोने का हो जाएगा पूरा सोमनाथ मंदिर!

भूपेंद्र सिंह, गिर सोमनाथ (8 अप्रैल): एक मंदिर जिसका जिक्र पुराणों में है। एक मंदिर जिसका उल्लेख सबसे पुराने वेद ऋगवेद में है। एक मंदिर जिस पर 17 बार आक्रमण किया गया, फिर भी अटूट बना रहा। वो एक मंदिर जिससे 900 साल पहले हजारों किलों सोना लूटा गया, फिर भी वहां सोना खत्म नहीं हुआ। वो मंदिर सदियों से करोड़ों हिंदुस्तानियों की आस्था का प्रतीक है। वो मंदिर है भगवान शिव का पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ। जिसके दर्शन करने से भोले के भक्तों के सारी मुसीबत दूर हो जाती हैं। अब उसी सोमनाथ से भोले के भक्तों के लिए एक अच्छी खबर आई है।

अब सोमनाथ के सुनहरे दर्शन होंगे क्योंकि पूरे मंदिर पर सोने की परत चढाई जाएगी। जिसके बाद सोमनाथ सोने के हो जाएंगे। सोमनाथ की भव्यता, दिन के उजाले में मंदिर का विराट स्वरूप दिखाई देता है। तो वहीं रात की चांदनी में दूधिया रोशनी में नहा जाता है सोमनाथ। अब सोमनाथ की भव्यता में एक और सुनहरा दौर जुड़ने जा रहा है। भोले को भक्तों के लिए गुजरात से एक अच्छी खबर आई है। अब नाथ के होंगे सुनहरे दर्शन अब मंदिर में गूंजेगी शहंशाह की आवाज़। सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट ने एतिहासिक फैसला किया है। जिसमें पूरे मंदिर पर सोने की परत चढ़ाई जाएगी। इसके लिए खाका तैयार कर लिया गया है। बस काम जल्द ही शुरु होने के आसार हैं।

केंद्र सरकार के साथ गुजरात सरकार भी मंदिर पर सुनहरी परत चढ़ाने में सहयोग करेगी। साथ ही खबर ये भी है चढ़ावे में आने वाले सोने का इस्तेमाल भी इस काम में किया जाएगा। इस स्वर्णिम अवसर के साक्षी बनने के लिए मंदिर ट्रस्ट के प्रतिनिधियों की मीटिंग होने वाली है। जिसमें पूरी तरह से प्लान तैयार किया जाएगा। आखिर सोमनाथ पर सुनहरी परत के लिए कितना सोना जरुरी होगा, और उसमें कितना वक्त लगेगा।

जब खुद को दोहराएगा इतिहास 

कहते हैं इतिहास अपने को दोहराता है। करीब 900 साल बाद सोमनाथ का इतिहास भी दोहराने के कगार पर है। जिस सोमनाथ को अथाह सोने का मंदिर कहा जाता था। जिसे गजनी ने 17 बार लूटा था। आज वही सोमनाथ सोने का सोमनाथ होने जा रहा है। और इसके लिए कोशिश आज से नहीं बल्कि आजादी के बाद से शुरु हो चुकी थीं। सोमनाथ को जितना बार लूटा गया। उतनी बार ही लोगों की आस्था सोमनाथ में बढ़ती गई। गजनी ने हर बार शिवलिंग को खंडित करने की कोशिश भी की। लेकिन शिव के चमत्कार के आगे वो बेबस हो गया। बस मंदिर को ही नुकसान पहुंचा पाया, जबकि शिव का सोमनाथ स्वरुप ज्यों का त्यों रहा।

सोमनाथ पर महमूद गजनी से 17 बार आक्रमण किया। तोड़फोड़ की, मंदिर से हजारों किलो सोना लूट ले गया। लेकिन ये चमत्कार था, वो लाख कोशिश के बाद भी शिवलिंग को खंडित नहीं कर पाया। जबकि उसने कई बार कोशिश की थी। एक विदेशी आक्रमणकारी की कोशिश सिर्फ सोने लूटने तक सीमित हो गई। गजनी के अलावा कई और मुगल शासकों ने सोमनाथ को लूटने की कोशिश । लेकिन सोमनाथ का अस्तित्व ज्यों का त्यों रहा। करीब 900 साल बाद फिर से सोने का होने जा रहा है सोमनाथ। इस बीच कई बार मंदिर का जीणोद्धार कराया गया। और सबसे बड़ा प्रयास सरदार बल्लभ भाई पटेल ने किया। सरदार पटेल ने सोमनाथ के पुर्निमाण के लिए शपथ ली थी। 13 नवंबर 1947 को अपने समर्थकों के साथ कहा था।

करीब तीन साल बाद 19 अप्रैल, 1950 को तत्कालीन सौराष्ट्र के मुख्यमंत्री ढेबरभाई ने मंदिर के गर्भगृह निर्माण के लिए भूमि खनन की अनुमति दी थी। जिसके बाद 8 मई 1950 को नवानगर के जाम साहब दिग्विजय सिंह ने मंदिर का शिलान्यास किया। 11 मई 1951को भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने सोमनाथ में शिवलिंग की प्रतिष्ठा की थी। जिसके बाद से आम भक्तों के लिए पूरी तरह सोमनाथ के द्वार खोल दिए गए थे। इसके बाद 13 मई, 1965 को दिग्विजय सिंह ने गर्भगृह और सभामंडप पर कलश प्रतिष्ठा कराई तथा शिखर पर ध्वजारोहण किया। तब से लेकर आज तक सोमनाथ भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और लगातार मंदिर को भव्य बनाने का निर्माण कार्य़ चलता रहा है। जिसमें अब एक और सुनहरा दौर जुड़ने को तैयार है। जब सोमनाथ सोने के कहलाएंगे।


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