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सेना को चाहिए 24 माइनस्वीपर जंगी बेड़े, लेकिन हैं सिर्फ 4

नई दिल्ली (11 मई): एक बार फिर देश की समुंद्री सीमा से जुड़ी बड़ी गंभीर खामी सामने आई है। भारत के पास अब सिर्फ चार पुराने माइनस्वीपर बचे हुए हैं। माइनस्वीपर खास किस्म के जंगी बेड़े होते हैं, जिनका इस्तेमाल दुश्मनों की बारूदी सुरंगों का पता लगाने और उनको खत्म करने में किया जाता है।

इस चिंताजनक कमी के बारे में ऐसे वक्त में पता चला है, जब हिंद महासागर क्षेत्र में चीन अपने न्यूक्लियर और पारंपरिक सबमरीन्स की तैनाती तेजी से बढ़ा रहा है। ये सबमरीन्स बेहद खामोशी से समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाकर भारतीय बंदरगाहों को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती हैं।

बता दें कि दिसंबर 2013 के बाद से इस क्षेत्र से कम से कम सात चीनी सबमरीन्स को इंडियन नेवी ने ट्रैक किया था। वहीं, सोवियत यूनियन की ओर से 1986-87 में भारत को मिले छह माइनस्वीपर्स में से दो आईएनएस करवार और आईएनएस काकीनाडा मंगलवार शाम मुंबई में नेवी की सेवा से रिटायर हो गए।

दरअसल, नेवी को पश्चिमी और पूर्वी तटों की हिफाजत के लिए ऐसे 24 माइनस्वीपर्स की जरूरत है। नेवी करीब एक दशक से इनकी मांग करती आ रही है। अगर 12 माइनस्वीपर्स को लकर साउथ कोरिया के साथ करार को इस साल अमली जामा पहना दिया जाता है तो भी पहला जंगी बेड़ा 2021 से पहले तैयार नहीं हो पाएगा। प्रॉजेक्ट की योजना के तहत, 9-9 महीने के अंतराल पर 11 अन्य माइनस्वीपर्स 2026 तक सौंपे जा सकेंगे।


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