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उत्तराखंड हाई कोर्ट का कमेंट, कभी-कभी प्रेसिडेंट भी गलत हो सकते हैं

देहरादून(20 अप्रैल): ''ये कोई राजा का फैसला नहीं है जिसका ज्यूडिशियल रिव्यू ना किया जा सके। एक तरफा पावर किसी को भी करप्ट कर सकता है। प्रेसिडेंट भी कभी-कभी गलत हो सकते हैं।'' ऐसा कमेंट किया उत्तराखंड हाई कोर्ट ने। दरअसल ये कमेंट हाई कोर्ट ने उत्तराखंड में प्रेसिडेंट रूल लगाने के मुद्दे पर किया है।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि हमारे कॉन्स्टिट्यूशन की यही खूबी है कि प्रेसिडेंट के फैसले को भी चैलेंज किया जा सकता है। जैसे कि किसी भी जज के फैसलों को रिव्यू किया जाता है, वैसा ही प्रेसिडेंट के फैसलों को भी किया जा सकता है।

कोर्ट ने यह सख्त टिप्पणी तब की, जब केंद्र ने दलील दी कि कोर्ट प्रेसिडेंट रूल के फैसले को रिव्यू नहीं कर सकता है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसफ और जस्टिस वीके बिष्ट की बेंच पूर्व सीएम हरीश रावत की पिटीशन पर सुनवाई कर रही है।

उत्तराखंड में क्यों लगा है राष्ट्रपति शासन

उत्तराखंड में 18 मार्च को राजनीतिक संकट शुरू हुआ था, जब 70 मेंबर्स की असेंबली में कांग्रेस के 36 में से 9 विधायक बागी हो गए थे। गवर्नर केके पॉल ने सीएम हरीश रावत को 28 मार्च तक विश्वास मत हासिल करने को कहा। केंद्र ने विश्वास मत हासिल करने के पहले 27 मार्च को राज्य में प्रेसिडेंट रूल लगा दिया।

कांग्रेस ने प्रेसिडेंट रूल के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने 31 मार्च को असेंबली में फ्लोर टेस्ट कराने का ऑर्डर दिया। कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को बतौर ऑब्जर्वर बनाया। साथ ही कांग्रेस के बागी और सस्पेंड हो चुके 9 विधायकों को भी वोटिंग की मंजूरी दी। इसके बाद 30 मार्च को केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को चैलेंज किया।


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