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नितिन गड़करी बोले- पीएम रोकेंगे पाकिस्तान का पानी, शरद यादव ने कहा-लग जाएंगे 100 साल

केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि पाकिस्तान का पानी रोकने का निर्णय केवल मेरे विभाग का नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार और पीएम स्तर पर निर्णय होगा लेकिन मैंने अपने विभाग से कहा है कि पाकिस्तान का जो इनके अधिकार क्षेत्र में पानी जा रहा

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 फरवरी): पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ काफिले पर हुए हमले के बाद देशभर में खासा आक्रोश है और लोग पाकिस्तान को सबक सिखाने की मांग कर रहे हैं। इसी कड़ी में भारत से पाकिस्तान की ओर जाने वाला पानी रोकने की मांग भी लगातार जोर पकड़ रही है। गुरुवार को केंद्रीय जल संसाधन एवं भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ट्वीट कर कहा कि सरकार ने हमारे हिस्से का पानी पाकिस्तान जाने से रोकने का निर्णय किया है। इसके तहत पूर्वी नदियों- रावी, ब्यास और सतलज का पानी डायवर्ट किया जाएगा। इन तीनों नदियों पर बने प्रोजेक्ट्स की मदद से पाकिस्तान को दिए जा रहे पानी को अब पंजाब और जम्मू-कश्मीर की नदियों में प्रवाहित किया जाएगा। गडकरी ने बताया कि इसके लिए जम्मू-कश्मीर के शाहपुर-कांडी में रावी नदी पर एक प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य की शुरुआत हो चुकी है। इसके अलावा एक अन्य प्रोजेक्ट की मदद से जम्मू-कश्मीर में रावी नदी का पानी स्टोर किया जाएगा और इस डैम का अतिरिक्त पानी अन्य राज्यों में प्रवाहित किया जाएगा।

हालांकि बाद में केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि पाकिस्तान का पानी रोकने का निर्णय केवल मेरे विभाग का नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार और पीएम स्तर पर निर्णय होगा लेकिन मैंने अपने विभाग से कहा है कि पाकिस्तान का जो इनके अधिकार क्षेत्र में पानी जा रहा था वो कहां-कहां रोक सकते हैं उसका टेक्निकल डिजाइन बनाकर तैयारी करो। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर इसे तरह से वो वर्ताव करेंगे और आतंकवाद का समर्थन करेंगे तो फिर उनका साथ मानवता का व्यवहार करने का क्या मतलब है।

गडकरी के इस ट्वीट के बारे में जल संसाधन मंत्रालय की प्रभारी सूचना अधिकारी नीता प्रसाद ने इस मुद्दे पर पूछे जाने पर कहा कि 'सिंधु संधि के बारे में ट्वीट कोई नया फैसला नहीं है। मंत्रीजी ने सामान्य तौर पर वही बात दोहराई है जो हमेशा कहते आए हैं। वह सिंधु के जल का पाकिस्तान जाने वाले भारत का हिस्सा मोड़ने की बात कर रहे हैं और वह हमेशा से यह कहते आए हैं।' साथ ही नीता प्रसाद ने कहा कि फैसले के वास्तविक क्रियान्वयन में 6 साल तक का वक्त लग सकता है, क्योंकि जल का प्रवाह रोकने के लिए 100 मीटर की ऊंचाई वाले बांध बनाने होंगे। आपको बता दें कि 1960 की सिंधु जल संधि के तहत पश्चिम की नदियों-सिंधु, झेलम और चेनाब का जल पाकिस्तान को दिया गया, जबकि पूर्वी नदियों रावी, व्यास और सतलुज का जल भारत को दिया गया।पाकिस्तान को पानी रोके जाने की बात पर पूर्व केंद्रीय मंत्री शहर यादव ने नितिन गडकरी की आलोचना करते हुए कहा कि नितिन गडकरी अच्छे आदमी हैं लेकिन पाकिस्तान को पानी रोके जाने की उनकी बात तर्क संगत नहीं है। भारत को रावी, ब्यास और सतलज की पानी को पाकिस्तान जाने से रोकने के लिए पहले आधारभूत ढांचा तैयार करना होगा इसके बाद ही  रावी, ब्यास और सतलज के पानी को पाकिस्तान जाने से रोका जा सकेगा और इसे करने में 100 साल लग जाएंगे।इससे पहले बुधवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि पाकिस्तान का पानी रोककर यमुना में लाया जाएगा। इसके लिए भारत के अधिकार वाली तीन नदियों के लिए प्रोजेक्ट तैयार कर लिया गया है। दिल्ली -आगरा से इटावा तक जलमार्ग की डीपीआर भी तैयार हो चुकी है। बागपत में रिवर पोर्ट बनाया जाएगा। पानी की कमी दूर होने से किसान अपनी फसल चक्र बदलें और चीनी मिलें गन्ने के रस से एथनॉल बनाएं, तो रोजगार और आमदनी भी बढ़ेगी।


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