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कैश में पेमेंट करना हो सकता है महंगा, सरकार लगा सकती है टैक्स

नई दिल्ली (17 दिसंबर): नोटबंदी के बाद सरकार देशभर में कैशलेस इकोनॉमी पर जोर दे रही है। इसके लिए सरकार लगातार लोगों से डिजिटल ट्रांजेक्शन करने के लिए अपील कर रही है। इसी कड़ी में सरकार अब कैश ट्रांजेक्शन पर सेस लगाने पर भी विचार कर रह ही है। नीति आयोग के सीईओ अभिताभ कांत के मुताबिक भविष्य में कैश पेमेंट पर टैक्स लग सकता है।

फिक्की की सालाना आम बैठक को संबोधित करते हुए कांत ने बताया कि 8 नवंबर को नोटबंदी के ऐलान के बाद सभी तरह के डिजिटल ट्रांजैक्शन में भारी बढ़ोतरी हुई है। पहले डिजिटल ट्रांजैक्शन पर 1.5 से 2 प्रतिशत का चार्ज लगता था, तब ऐसे ट्रांजैक्शन बहुत कम होते थे। अब ऐसे ट्रांजैक्शन बढ़ चुके हैं।

8 नवंबर के बाद से रुपे से ट्रांजैक्शन में 316 फीसदी इजाफा हुआ है। ई-वॉलिट्स से 271 प्रतिशत, यूपीआई से 119 प्रतिशत, USSD से 1,202 प्रतिशत और POS से ट्रांजैक्शन में 95 फीसदी का इजाफा हुआ है। अब डिजिटल ट्रांजैक्शन में बढ़ोतरी हुई है इसलिए इस पर बहुत कम चार्ज लगेगा। मर्चेंट डिस्काउंट रेट में कमी आएगी।

अमिताभ कांत ने कहा कि सरकार डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए पहले ही 11 अलग-अलग तरह के इन्सेंटिव दे रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 10 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी वाला देश बनने के लिए और 7.5 प्रतिशत की विकास दर को बरकरार रखने के लिए डिजिटाइजेशन जरूरी है। कांत ने कहा कि अगले साल जनवरी मध्य तक कैश की किल्लत दूर हो जाएगी।

नीति आयोग के सीईओ अभिताभ कांत के मुताबिक सरकार डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए अगले कुछ महीनों में 340 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। डिजिटल पेमेंट को प्रोत्साहित करने के लिए लकी ग्राहक योजना, डिजि धन व्यापारी योजना जैसी कई योजनाएं शुरू की गई हैं। अमिताभ कांत ने यह भरोसा दिलाया कि पिछले सालों के अकाउंट की जांच के दौरान किसी भी कारोबारी या व्यापारी को टैक्स अफसरों द्वारा परेशान नहीं किया जाएगा।


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