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इस शख्‍स के आगे पाक ने टेके थे घुटने

नई दिल्‍ली (26 जनवरी): 26 जनवरी को देश के वीरों को सम्मानित किया जा रहा है। जब भी वीरों की बात हो तो निर्मलजीत सिंह सेखों का जिक्र होना स्वाभाविक है। साल 1971 में हुए भारत-पारकिस्तान युद्ध में मिली फतेह को जब भी याद किया जाएगा तो फ्लाइंग ऑफिसर सेखों की वीरता का जिक्र जरूर सामने आएगा।

पाक ने टेके थे घुटने 14 दिसंबर को श्रीनगर एयरपोर्ट पर 6 पाक लड़ाकू विमानों ने हमला कर दिया। उस वक्त एयरपोर्ट पर धूल का बादल था। उड़ान भरना मुश्किल था। फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों ने इसकी परवाह किए बिना उड़ान भरी और पाकिस्तानी विमानों से भिड़ गए। उन्होंने दो दुश्मन जहाजों को मार गिराया और बाकियों को भी हमला करने से रोक दिया, लेकिन इस बीच उनका अपना विमान हमले की चपेट में आ गया। अपनी जान गंवाने से पहले वह पाक विमानों को भगा चुके थे। फ्लाइंग सिख सेखों शहीद हो गए।

जवानी में देश के लिए हुए शहीद फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों का जन्म पंजाब के लुधियाना के रूरका गांव में 17 जुलाई 1943 को हुआ था। महज 28 साल की उम्र में देश के लिए लड़ते हुए सेखों 14 दिसंबर 1971 को शहीद हो गए थे। जंग से बस कुछ ही महीने पहले उनका विवाह हुआ था और उसमें भी निर्मलजीत सिंह ने पत्नी मंजीत के साथ बहुत थोड़ा सा समय बिताया था। नए जीवन के कितने की सपने उनकी आंखों में रहे होंगे, जो देश की मांग के आगे छोटे पड़ गए।

मरणोपरांत मिला परमवीर चक्र युद्ध में देश की रक्षा करते हुए 14 दिसंबर को सेखों शहीद हो गए थे। उनकी वीरता को देखते हुए 26 जनवरी 1972 को राष्ट्रपति वीवी गिरी ने सेखों को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया था। परमवीर चक्र वीरता के लिए दिए जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। निर्मलजीत सिंह सेखों इंडियन एयरफोर्स के एकमात्र परमवीर चक्र विजेता है।


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