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निर्भया के हत्यारे मुकेश की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला

निर्भया के हत्यारे मुकेश की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुनाएगा। मुकेश ने राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किये जाने के फैसले के फैसले को चुनौती दी है। मुकेश ने आरोप लगाया है कि दया याचिका मनमाने ढंग से, तथ्यों की अनदेखी करके किया गया। दया याचिका की सुनवाई में उचित निर्धारित प्रकिया का पालन नहीं हुआ।

mukesh singh

प्रभाकर मिश्रा, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (29 जनवरी): निर्भया (Nirbhaya) के हत्यारे मुकेश (Mukesh) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) आज फैसला सुनाएगा। मुकेश ने राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किये जाने के फैसले के फैसले को चुनौती दी है। मुकेश ने आरोप लगाया है कि दया याचिका मनमाने ढंग से, तथ्यों की अनदेखी करके किया गया। दया याचिका की सुनवाई में उचित निर्धारित प्रकिया का पालन नहीं हुआ। पटना हाईकोर्ट की पूर्व जज अंजना प्रकाश ने मुकेश की तरफ से दलील देते हुए कहा कि दया याचिका 14 जनवरी की दायर हुई और 17 तारीख को राष्ट्रपति ने याचिका खारिज कर दी। अंजना प्रकाश ने दलील दी कि इस मसले पर जेल सुपरिटेंडेंट की सिफारिश को राष्ट्रपति के सामने नहीं रखी गई। मुकेश जेल के अंदर यौन शोषण का शिकार हुआ। उसकी पिटाई हुई। इस मामले में उसके सह आरोपी राम सिंह की हत्या हो गई लेकिन इस आत्महत्या बताकर केस बन्द कर दिया गया। 

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मुकेश की वकील ने यह भी दलील दी कि दया याचिका के बिना खारिज हुए फांसी की सजा पाए अपराधियों को एकांत कारावास में रखना असंवैधानिक है जबकि निर्भया के हत्यारों को एकांत कारावास में रखा गया। मुकेश की वकील ने भवनात्मक दलील देते हुए कहा कि यह किसी की जिंदगी का सवाल है और फैसला आपके हाथ में है। इस पर दिल्ली पुलिस के तरफ से दलील देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि - 'माय लार्ड, विडंबना देखिए कि आज जीवन के मूल्य की वकालत कौन कर रहा है! वह जिसके लिए किसी दूसरे के जीवन का कोई मूल्य नहीं था। जिसने एक लड़की ( निर्भया) के साथ इतनी क्रूरता की।

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तुषार मेहता ने दया याचिका जल्दबाजी में खारिज किये जाने का आरोपों को खारिज करते हुए दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने खुद ही कहा था कि दया याचिका को लंबित रखना अमानवीय है। सरकार ने कोर्ट की इस भावना का सम्मान किया है। राष्ट्रपति ने सभी तथ्यों को ध्यान में रखकर बिना विलंब के याचिका पर फैसला किया। यह आरोप सही नहीं है कि मनमाने ढंग से दया याचिका खारिज की गई।

तुषार मेहता ने दलील दी कि दया याचिका के निपटारे में विलंब को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। लेकिन निपटारे में शीघ्रता को आधार बनाकर चुनौती नहीं दी जा सकती।

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मुकेश की तरफ से अंजना प्रकाश दलील दे रही थीं जबकि देश के दो जाने माने वकील वृंदा ग्रोवर और रेबेका जॉन उनकी सहायता के लिए साथ मौजूद थीं। तीन सदस्यीय बेंच की अगुवाई कर रही जस्टिस भानुमति ने कहा कि राष्ट्रपति के फैसले की समीक्षा का कोर्ट के पास सीमित अधिकार है। कोर्ट को केवल यह देखना है कि राष्ट्रपति के पास केस से जुड़े जरूरी दस्तावेज रखे गए थे या नहीं। कोर्ट कल फैसला सुनाएगा।

(Image Credit: Google)


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