News

निर्भया के चारों हत्यारों को एक साथ ही होगी फांसी !, जानिए इसकी पूरी वजह

निर्भया गैंगरेप (Nirbhaya Gangrape) और हत्या के दोषी की दया याचिका (Mercy Petition) शुक्रवार को खारिज हो गयी। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के दिशा-निर्देश के मुताबिक दया याचिका (Mercy Petition) खारिज होने

Nirbhaya, निर्भया

Image Source Google

प्रभाकर मिश्रा, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(17 जनवरी): निर्भया गैंगरेप (Nirbhaya Gangrape) और हत्या के दोषी की दया याचिका (Mercy Petition) शुक्रवार को खारिज हो गयी। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के दिशा-निर्देश के मुताबिक दया याचिका (Mercy Petition) खारिज होने के 14 दिन के भीतर दोषी को फांसी पर नहीं लटकाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने यह व्यवस्था शत्रुघ्न चौहान केस में दी थी। इसलिए ट्रायल कोर्ट ने 22 जनवरी वाले डेथ वारंट की जगह नया डेथ वारंट जारी किया है कर कहा कि चारों दोषियों को एक फरवरी सुबह 6 बजे, लेकिन निर्भया के हत्यारों को उस दिन भी फांसी नहीं होगी, इसकी पर्याप्त संभावना है।

निर्भया के चारों हत्यारों को फांसी की सजा मिली हुई है। अभी केवल एक हत्यारे मुकेश की दया याचिका खारिज हुई है। अभी तीन हत्यारों ने दया याचिका दायर भी नहीं की है। लेकिन यह भी तय है कि इन तीनों की तरफ से दया याचिका दायर होगी। और जबतक इनकी दया याचिका पर फैसला नहीं हो जाता,मुकेश को भी फांसी नहीं हो सकती क्योंकि चारों दोषियों को एक साथ ही फांसी दी जाएगी।

एक साथ फांसी देने की व्यवस्था के बारे में कानून स्पष्ट नहीं है, लेकिन पिछले दिनों में जितनी फांसी हुई है, एक अपराध के दोषी को एक साथ ही फांसी दी गयी हैं। तिहाड़ जेल के अधिकारी से पूछने पर बताते हैं कि इस मामले में नियम स्पष्ट नहीं है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के वकील ज्ञानंत सिंह ने बताया कि निर्भया के चारों दोषियों को एक साथ ही फांसी होगी। ज्ञानंत सिंह ने 1982 के एक केस का हवाला दिया जो बहुत रोचक है। उत्तर प्रदेश के चार लोगों की हत्या के एक मामले में में ट्रायल कोर्ट से तीन लोगों को फांसी की सजा हुई। एक एक कर तीनों का मामला सुप्रीम कोर्ट आया। एक दोषी को फांसी दे दी गयी। दूसरे के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा आजीवन कारावास में बदल दी। तीसरे हरवंश सिंह की फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगाई।

पुनर्विचार याचिका खारिज हो गयी। हरवंश ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका लगायी। राष्ट्रपति ने दया याचिका खारिज कर दी। हरवंश ने फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। और दलील दी कि एक ही मामला, एक ही अपराध, एक एक आदमी को फांसी पर लटका दिया गया। एक की फांसी की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दी। तो उसे क्यों फांसी दी जा रही है? कोर्ट को अहसास हुआ कि गड़बड़ी तो हुई है। हरवंश सिंह की फांसी की सजा आजीवन कारावास में बदल दी गयी। सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दिया कि किसी दोषी को फांसी पर लटकाने से पहले जेल सुपरिटेंडेंट को यह सुनिश्चित करना होगा कि उस मामले में सह आरोपी की फांसी की सजा कहीं आजीवन कारावास में बदली तो नहीं गयी! और अगर ऐसा हुआ है तो यह बात तत्काल संबंधित कोर्ट के संज्ञान में लायी जानी चाहिए। इसी में यह बात भी छुपी हुई है कि जबतक सभी आरोपियों की सभी याचिकाओं पर फैसला नहीं हो जाये, किसी एक को फांसी पर नहीं लटकाया जाना चाहिए।


Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 and Download our - News24 Android App . Follow News24online.com on Twitter, YouTube, Instagram, Facebook, Telegram , Google समाचार.

Tags :

Top