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न्यूज़ 24 एक्सक्लूसिव: ऑपरेशन 'लाल सिलेंडर'

राहुल प्रकाश, नई दिल्ली (4 अप्रैल): ऑपरेशन लाल सिलिंडर में हम उन लोगों के बेनकाब करने की कोशिश करेंगे जो आपको लूट रहे हैं। हर दिन जब आपके किचेन में चूल्हा जलता है तो ये लुटेरे आपकी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा उड़ा ले जाते हैं। ये हर उस हिंदुस्तानी से जुड़ी ख़बर है जिसके घर में एलपीजी पर खाना बनता है?

आपके किचन का बजट बिगाड़ने वाले लुटेरों के नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए न्यूज़ 24 की टीम दिल्ली की सड़कों पर अपने कैमरा और माइक के साथ निकल गई। दिल्ली के पॉश हौज खास इलाके में हमारी नजर एक टेम्पो पर पड़ी जिसमें एलपीजी सिलेंडर लदे हुए थे। न्यूज़ 24 संवाददाता राहुल प्रकाश जैसे ही टेम्पों के पास पहुंचे, कैमरे में वो सब रिकॉर्ड हो गया जिसके बारे में आप सोच भी नहीं सकते हैं। बीच बाजार में ही आपके और हमारे किचन में पहुंचने वाली गैस की लूट हो रही थी। भरे हुए सिलिंडर को गैस चोर ने खाली सिलेंडर रख दिया और भरे सिलेंडर से खाली सिलेंडर में गैस ट्रांफसर का काम शुरू हो गया। गर्दन फंसी देखकर तुरंत इस गैस चोर ने माफी मांगने में ही भलाई समझी, लेकिन मौका मिलते ही पूरी रफ्तार से भागने लगा।

सरेआम गैस की लूट देखकर बाजार में मौजूद लोग दंग थे। उनकी समझ में आ गया कि क्यों उनका सिलेंडर अब 25-30 दिन की जगह 15 से 30 दिन में ही खत्म हो जा रहा है। उसके बाद न्यूज़ 24 की टीम दिल्ली के बेगमपुर इलाके में पहुंची। वहां भी सरेआम आपकी किचेन में पहुंचनेवाली गैस की लूट हो रही थी। खुफिया कैमरे में हिंदुस्तान के गैसचोरों की तस्वीर कैद हो रही थी। ये गैस चोरों की आपस में बातचीत हो रही है-जो न्यूज़ 24 के खुफिया कैमरे में रिकॉर्ड हो गई।

भरे सिलेंडर से खाली सिलेंडर में गैस निकालने का काम बेहद खतरनाक होता है, लेकिन लोहे की ये नालीनुमा चीज गैस निकालने का काम बहुत आसान कर देती है। गैस चोर इस यंत्र को अपनी कोड भाषा में बांसुरी के नाम से जानते हैं। भरे सिलेंडर को खाली सिलेंडर के सामने लिटा दिया जाता है फिर बांसुरी से दोनों को जोड़-दिया जाता है। कुछ मिनट इंतजार के बाद आपके सिलेंडर से गैस निकल जाती है और फिर वो सिलेंडर आपके पास पहुंचा दिया जाता है, वो भी सील बंद कर। सिलेंडर से गैस निकालने का खेल पुराना है।

जब सिलेंडर में गैस कम होने का शक हुआ तो लोगों ने घर में कांटा खरीदना शुरू कर दिया, गैस तौल कर लेने लगे। लेकिन हॉकरों ने इसकी भी काट निकाल ली। निकाले गए गैस की जगह सिलेंडर में पानी भरना शुरू कर दिया। जबकि गैस की चोरी रोकने के लिए पहले से ही सख्त नियम हैं।अब जरा आप याद कीजिए कि आपको कितनी बार हॉकरों ने सिलेंडर को कांटे पर तौल कर दिखाया है। हॉकर हमेशा अलग तरह की कहानी गढ़ लेते हैं और जेब कटती है हिंदुस्तान के आम आदमी की। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर एलपीजी में महालूट पर कब रोक लगेगी? जिन एजेंसी मालिकों के यहां से सिलेंडरों की गैस चोरी होती है उन पर लगाम क्यों नहीं कसी जाती। उनसे क्यों नहीं पूछा जाता कि तुम्हारा हॉकर गैस चोरी कैसे कर रहा है?

एजेंसी मालिक सिलेंडर बांटने का काम ठेकेदारों के हवाले कर देते हैं। हॉकर ठेकेदार का कर्मचारी होता है, जिसे बेहद कम सेलरी दी जाती है या नहीं दी जाती है। हॉकरों को कहा जाता है कि गैस चोरी करो और चोरी के पैसे में एजेंसी मालिक से लेकर ठेकेदार और हॉकर का हिस्सा लगता है। एजेंसी मालिक से पूछताछ होती है तो वो कह देता कि ऐसा कोई हॉकर मेरी कंपनी में काम ही नहीं करता है। इस तरह से आपके सिलेंडर से गैस चोरी का सिलसिला बराबर चलता रहता है वो भी बिना कार्रवाई के डर के। लेकिन आम लोगों को चूना लगाने का काम सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है।

मतलब रसोई गैस में महालूट की जड़े बहुत ऊपर तक हैं। इतना ही नहीं, सिलेंडर पर जिस सील का हवाला अक्सर हॉकर देता है, उसमें भी कोई दम नहीं हैं। इस काले कारोबार से जुड़े लोग कार्क में लगने वाले कंपनी के डुप्लीकेट रेपर छपवा लेते हैं और सिलेंडर को सील करनेवाली मशीन भी बाजार से 6 से 10 हजार रुपये में आराम से मिल जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि एलपीजी इस्तेमाल करनेवाले हिंदुस्तान के 16 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं से कब तक धोखा होता रहेगा?

वीडियो में देखें पूरी रिपोर्ट:

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