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नेपाल के माओवादियों को गृहयुद्ध के मामलों में सजा मिलने की आशंका

नई दिल्ली (17 मई): नेपाल के माओवादी संगठनों ने अपने धड़ों को एकजुट करने का फैसला किया है ताकि गृह युद्ध के दौरान अपराधों को सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में लाने के ओली सरकार के कदम का विरोध किया जा सके। इन संगठनों को डर है कि मानवाधिकारों के हनन को लेकर सरकार सुप्रीम कोर्ट की आड़ में शीर्ष नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। यूसीपीएन-माओवादी के अध्यक्ष प्रचंड और सीपीएन-माओवादी से अलग हुए कट्टरपंथी  मोहन वैद्य ने सुप्रीम कोर्ट को गृह युद्ध के दौरान के अपराधों को अपने अधिकार क्षेत्र में लाने देने के कदम का विरोध किया है।

नेपाल के छह माओवादी समूह अलग-अलग मांग करते रहे हैं कि गृह युद्ध काल के दौरान मानवाधिकारों के हनन के सभी मामलों के निराटारे का अधिकार टीआरसी आयोग को ही मिलना चाहिए। करीब एक दशक लंबे उग्रवाद के दौरान नेपाल में 16,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे और लाखों विस्थापित भी हुए थे। यूसीपीएन-माओवादी के वरिष्ठ नेता नारायणकाजी श्रेष्ठ ने कहा, अदालत भगवान नहीं है। इसे नेपाली समाज, कानून और शांति प्रक्रिया की भावना के मुताबिक फैसला सुनाना चाहिए। नेपाली सुप्रीम कोर्ट ने टीआरसी को गृह युद्ध के दौरान हुए मानवाधिकार हनन के मामलों की जांच करने से रोक दिया है।

 


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