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नगरोटा: शहीद राघवेंद्र की कहानी जानकर आंखों में आ जाएंगे आंसू

अभिषेक शर्मा, धौलपुर (30 नवंबर): देश के लिए मर मिटने वाले शहीदों में राजस्थान के एक और वीर सपूत का नाम जुड़ गया। ग्रेनेडियर राघवेन्द्र सिंह जिनकी उम्र महज 28 साल थी। 6 साल पहले ही वो सेना में भर्ती हुए थे। 2 साल पहले उनकी शादी हुई और 5 महीने का बेटा है। पूरे परिवार को उनकी शहादत पर फख्र है।

राजस्थान की मिट्टी के सपूत ग्रेनेडियर राघवेंद्र सिंह आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। ग्रेनेडियर राघवेंद्र सिंह परिहार अभी महज 28 साल के थे। वे 6 साल पहले आर्मी की 3 ग्रेनेडियर में भर्ती हुए थे। अभी दो साल पहले ही शादी हुई थी। 5 महीने का बेटा है। लेकिन जब देश का सवाल आया तो उन्होंने अपने फर्ज़ को सबसे ऊपर रखा। देश की मिट्टी का चुकाने के लिए अपना बलिदान दे दिया।

गोलियों की बौछार के बीच वे घंटों आतंकियों के सामने डटे रहे और आखिरकार सीने पर गोली खाई। राघवेंद्र को आर्मी की वर्दी बचपन से ही अपनी तरफ खींचती थी। स्कूल में पढ़ाई के वक्त ही तय कर लिया था कि सेना में जाऊंगा। देश की सरहद की रक्षा करूंगा। हिंदुस्तान के दुश्मनों के दांत खट्टे करूंगा। आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि राघवेंद्र कई बार फौज की भर्ती में शामिल हुए थे। हर बार कुछ ना कुछ वजहों से उनका सेलेक्शन नहीं हो पाता, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आखिरकार उन्होंने भर्ती परीक्षा पास की और सेना की वर्दी पहनने के ख्वाब को हकीकत में बदला।

राघवेंद्र कुछ दिनों पहले छुट्टी पर घर आए थे। ड्यूटी जाने से पहले पत्नी अंजू को मायके मुरैना छोड़ने गए थे। कहा था, जल्द आऊंगा लेकिन ये वादा अब हमेशा अधूरा रहेगा। राघवेंद्र मां के बेहद करीब थे और उन्होंने एक दिन पहले मां से फोन पर बात की थी। उन्होंने मां से कहा था कि अपना ख्याल रखना, मैं फिर जल्दी ही घर आउंगा, मेरी चिंता मत करना। मैं ठीक हूं। मां से ये उनकी आखिरी बातचीत थी। राघवेंद्र की शहादत की खबर सुनते ही परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। मां और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। घरवालों को एक तरफ देश के लिए शहीद होने पर फख्र था तो राघवेंद्र के अब कभी घर वापस नहीं लौट पाने का दुख था।

खबर सुनते ही घर के पास लोगों का तांता लगने लगा। बड़े बुजुर्गों ने कहा कि आज पूरा गांव अपने जांबाज़ सपूत पर गर्व कर रहा है। देश के लिए पुर्जा-पुर्जा कट मरने का हौसला देश की मिट्टी में रचा बसा है। राजस्थान की माटी के इस सपूत ने साबित कर दिया है कि हमला चाहे कितना भी बड़ा हो, लेकिन दुश्मनों की चुनौती के आगे भारत का हौसला कभी नहीं डिगेगा। एक बार फिर पाकिस्तान को जैसे का तैसा जवाब देने की घड़ी आ चुकी है।

वीडियो:

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