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'ट्रिपल तलाक का गलत इस्तेमाल करने वालों का सोशल बायकॉट होगा'

नई दिल्ली(17 अप्रैल): ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने रविवार को कहा कि अगर ट्रिपल तलाक का गलत इस्तेमाल किया गया, तो ऐसा करने वालों का सोशल बायकॉट किया जाएगा। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दो दिन की मीटिंग के बाद मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने ये जानकारी दी।

- मीटिंग में बाबरी मसले पर भी चर्चा की गई।

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि ट्रिपल तलाक को लेकर काफी गलतफहमियां हैं, इस पर बोर्ड कोड ऑफ कंडक्ट जारी करेगा।

- बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी मौलाना वलीम रहमानी ने कहा, "पर्सनल लॉ बोर्ड का मानना है कि तीन तलाक औरत को मुश्किलों से बचाने के लिए है। हम दूसरे मजहब में दखल नहीं करते हैं, तो दूसरा मजहब भी हमारे मामले में दखल ना दे। तलाक का मामला शरीयत के हिसाब से ही रहेगा। जब कोर्ट का फैसला आएगा, तब हम उसे देखेंगे।"

- "ट्रिपल तलाक मामले में अगर कोड ऑफ़ कंडक्ट को फॉलो नहीं किया गया है या शरिया में बताए गए कारणों के अलावा यदि कोई अन्य बहाने से तीन तलाक देता है, तो उसका सोशल बायकॉट किया जाएगा।"

- ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सेक्रेटरी जफरयाब जिलानी ने कहा, "जब पुरुष गुस्से में, नशे में या फिर बिना तलाक की नीयत से एक साथ 3 बार तलाक बोल देता है, तो शरियत के हिसाब से उसे गुनाह माना जाता है। लेकिन, इस तरह से दिए गए तलाक को भी मान लिया जाता है।"

- मौलाना रहमानी ने कहा, "अगर शरियत के हिसाब से व्हॉट्सऐप, पोस्टकार्ड, कुरियर से भी तलाक भेजा गया, तो वो मान्य होगा। जिस तरह से शादी के लिए पोस्टकार्ड से दावतनामा भेजा जाता है, वो भी माना जाता है। इसी तरह अगर कोई किसी माध्यम का प्रयोग करते हुए तलाक देता है तो वह भी जायज होगा।"

- मौलाना रहमानी ने कहा, "इस्लाम में मर्द औरत दोनों को बराबर का हक दिया गया है। इसलिए हमने यह फैसला लिया है कि माता-पिता निकाह में अपनी बेटियों को दहेज देने की जगह उन्हें जायदाद में हिस्सा दें।"

- रहमानी ने कहा, "हलाला की गलत तस्वीर पेश की जाती है। हलाला का मतलब है कि अगर किसी ने ट्रिपल तलाक दिया है, तो वह महिला हराम है। हमने ट्रिपल तलाक के सपोर्ट में एक सिग्नेचर कैम्पेन चलाया था। जिसमें 5 करोड़ 83 लाख ट्रिपल तलाक के सपोर्ट में सिग्नेचर मिले हैं। 1 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम महिलाओं ने सिग्नेचर किया है।"

- रहमानी ने बाबरी मसले पर कहा कि ये आपसी समझौते से हल नहीं हो पाएगा। इसमें सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही बोर्ड को मंजूर है।

- लखनऊ में शनिवार से बोर्ड की बैठक चल रही थी। इसमें मौलाना वली रहमान, सैफुल्लफ़ रहमानी, रशीद फिरंगी महली, डॉ. कलबे सादिक, वली रहमानी, डॉ सज्जाद, कमाल फारूकी, मौलाना राबे हसन नदवी के साथ ही देश भर से बोर्ड सदस्य आए हुए हैं।


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