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10 साल के मनरेगा पर मोदी का यू-टर्न

नई दिल्‍ली (2 फरवरी): देश में गांवों के हालात बदलने और लोगों के लिए रोजगार के ज्यादा से ज्यादा अवसर पैदा करने के मकसद से शुरु हुई महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को आज दस साल हो गए। कांग्रेस राज में शुरू हुए मनरेगा पर पिछले साल संसद में मोदी ने खूब चुटकी ली थी। मनरेगा को कांग्रेस की विफलताओं का स्मारक बताया था, लेकिन एक साल बाद अब बीजेपी भी मनरेगा का गुणगान कर रही है।

एक साल पहले ही 27 फरवरी को संसद में खड़े होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस मनरेगा योजना की जमीन पर कांग्रेस पर ताबड़तोड़ चुटीले वार किए थे। आज उसी मनरेगा योजना को दस साल पूरे हो गए हैं। एक साल पहले तक मनरेगा को कांग्रेस की विफलता का स्मारक बताने वाली बीजेपी अब मनरेगा योजना के साथ अपनी सरकार का गुणगान भी जोड़ रही है। जिस वक्त सरकार मनरेगा के दस साल का जश्न मना रही थी। तब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आंध्र प्रदेश के उस गांव में मौजूद थे, जहां से आज ही के दिन दस साल पहले मनरेगा योजना शुरु हुई थी।

10 साल के मनरेगा पर अब तक सरकारों ने करीब 3,13,844 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। 2 फरवरी 2006 में देश के 200 जिलों से शुरु हई मनरेगा को एक अप्रैल 2008 में पूरे देश में लागू कर दिया गया था। इस योजना का मकसद 100 दिनों का रोजगार देकर गांवों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को सुधारना है। मनरेगा के तहत आज जितने लोगों को रोजगार मिलता हैं उसमें 57 फीसदी महिलाएं हैं। मनरेगा की सफलता का ये पैमाना ही है कि विश्व बैंक ने 2015 की अपनी रिपोर्ट में इसे दुनिया का सबसे बड़ा जन रोजगार देने वाला प्रोग्राम बताया।


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