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पिछले पांच साल की बुनियाद का नतीजा है इन 75 दिनों में हासिल की गयी उपलब्धियां- मोदी

हमारी सरकार ने इन 75 दिनों में जो हासिल किया है, वह उस मजबूत बुनियाद का परिणाम भी है, जिसे हमने पिछले पांच साल में रखी थी, कार्यान्वयन और साहसी निर्णय लेना, कश्मीर से बड़ा कोई निर्णय नहीं हो सकता।’

 न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (13 अगस्त): आम तौर पर कोई भी सरकार अपना रिपोर्ट कार्ड 100 दिन में पेश करती है, लेकिन मोदी सरकार ने 75 दिनों में ही अपना रिपोर्ट कार्ड पेश कर दिया है। एक न्यूज एजेंसी दिए एक इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कहा कि इस सरकार ने जो हासिल किया है, वह एक स्पष्ट नीति और सही दिशा का परिणाम है।

पीएम मोदी ने कहा, 'हमने अपनी सरकार बनने के चंद दिनों के भीतर ही एक अभूतपूर्व रफ्तार तय कर दी। हमने जो हासिल किया है, वह स्पष्ट नीति, सही दिशा का परिणाम है। हमारी सरकार के प्रथम 75 दिनों में ही ढेर सारी चीजें हुई हैं।' पीएम ने कहा कि हमने जल आपूर्ति सुधारने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के एकीकृत दृष्टिकोण और एक मिशन मोड के लिए जलशक्ति मंत्रालय के गठन के साथ हमारे समय के सर्वाधिक जरूरी मुद्दे को सुलझाने के साथ शुरुआत की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की जिस जोरदार तरीके से वापसी हुई है, उसका यह परिणाम है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने इन 75 दिनों में जो हासिल किया है, वह उस मजबूत बुनियाद का परिणाम भी है, जिसे हमने पिछले पांच साल के कार्याकाल में बनाए थे। पीएम ने कहा, 'पिछले पांच सालों में किए गए सैकड़ों सुधारों की वजह से देश आज इस गति से आगे बढ़ने के लिए तैयार है, इसमें जनता की आकांक्षाएं जुड़ी हुई हैं। यह सिर्फ सरकार के कारण नहीं, बल्कि संसद में मजबूती की वजह से भी हुआ है।'

पीएम मोदी ने 17वीं लोकसभा के बजट सत्र में सबसे ज्यादा काम होने पर भी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, 'मेरी नजर में यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है, बल्कि बेहतरी का एक ऐतिहासिक मोड़ है, जिसने संसद को जनता की जरूरतों के प्रति अधिक जवाबदेह बनाया है। कई ऐतिहासिक पहले शुरू की गई, जिसमें किसानों और व्यापारियों के लिए पेंशन योजना, मेडिकल सेक्टर का रिफॉर्म, दिवाला एवं दिवालियापन संहिता में महत्वपूर्ण संशोधन, श्रम सुधार की शुरुआत...मैं लगातार आगे बढ़ता रहा। कोई समय की बर्बादी नहीं, कोई लंबा सोच-विचार नहीं, बल्कि कार्यान्वयन और साहसी निर्णय लेना, कश्मीर से बड़ा कोई निर्णय नहीं हो सकता।’

पीएम ने एनएमसी बिल को लेकर डॉक्टरों की नाराजगी पर पूछे गए सवाल पर कहा कि जब 2014 में सरकार बनी थी, तब मेडिकल शिक्षा की मौजूदा व्यवस्था को लेकर कई तरह की चिंताएं सामने आई थीं। इससे पहले, अदालतों ने भारत में मेडिकल शिक्षा को संभाल रही संस्थाओं के खिलाफ कड़े शब्दों में आपत्ति दर्ज कराई थी, इन्हें भ्रष्टाचार के गढ़ कहा था। एक संसदीय समिति ने गहन अध्ययन के बाद मेडिकल शिक्षा को लेकर निराशाजनक तस्वीर पेश की थी। पहले की सरकारों ने इस क्षेत्र को सुधारने के बारे में सोचा था, लेकिन इस दिशा में वे आगे नहीं बढ़ सकी थीं।

पीएम ने कहा, 'हमने इस दिशा में आग बढ़ने का फैसला किया, क्योंकि यह मामला ऐसा नहीं है, जिसे हल्के में लिया जाए। यह हमारे लोगों की सेहत और हमारे युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है। मौजूदा समस्याओं से निपटने के लिए राष्ट्रीय मेडिकल आयोग (एनएमसी) इस क्षेत्र में एक दूरगामी सुधार है। इसमें सुधार के कई आयाम हैं, जो भ्रष्टाचार के मौकों को खत्म करते हैं और पारदर्शिता को बढ़ाते हैं।'

Images Courtesy:Google


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