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चमत्कार- केदारनाथ से कालेश्वर तक एक ही देशांतर में स्थित हैं भगवान शंकर के मंदिर !

नई दिल्ली (21 फरवरी): भारतीय सनातन धर्म और मंदिरों की पुरातन विशेषताओ का जब साक्ष्य नहीं मिले तो उनके बारे में प्रचलित कथाओं का मिथक कह दिया गया। भारतीय मंदिरों और धर्म से जुडी कुछ ऐसे तथ्यों पर एक खोज हुई है। जिससे पता चलता है कि भारतीय  आज के विज्ञानियों से ज्यादा अक्लमंद थे। इस खोज ने यह भी साबित किया है कि भारतीय मंदिरों के बारे में धर्मशास्त्रों में जो विवरण मिलता है वो मिथक नहीं विज्ञान सम्मत है। इसका उदाहारण भगवान शिव के आठ प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिनका निर्माण कई शताब्दी पहले हुआ। सुदूर उत्तर से दक्षिण तक फैले ये सभी मंदिर 79 डिग्री पूर्व देशांतर में स्थित है। यानी ईशान दिशा मे...। इन सभी मंदिरों का निर्माण अलग-अलग समय अलग-अलग राजाओँ ने करवाया।  उस समय आज के जैसे जीपीएस सिस्टम भी नहीं था। फिर भी सभी मंदिरों का ईशान में एक ही डिग्री पर होना बताता है कि वेदिक विज्ञान आज के विज्ञान से कहीं ज्यादा आगे था। 

केदारनाथ- धर्मशास्त्रों में बताया गयाहै कि केदारनाथ में पाण्डवों ने भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए यहां तप किया था। भगवान शिव ने जिस स्थान पर पाण्डवों को दर्शन दिये उसी स्थान पर केदारनाथ मंदिर है। यह मंदिर 79 डिग्री पूर्व देशांतर में स्थित है। 

कालहस्ती- केदार नाथ से सुदूर दक्षिण में आंध्र प्रदेश की स्वर्णमुखी नदी तट पर भगवान शंकर के इस अदभुत मंदिर को पल्लव वंश के राजाओं ने स्थापित किया था। आगे चलकर 11 वीं शताब्दी मेंचोल शासकों ने पुनुर्द्धार करवाया। यह मंदिर 79 डिग्री पूर्व देशांतर पर है।

एकम्बरनाथ- तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित एकम्बरनाथ मंदिर 500ईसवीं सदी का में विजयनगरम सम्राट ने बनवाया था। भगवान शंकर के लिंग स्वरूप दर्शन वाला यह मंदिर भी 79 डिग्री पूर्व देशांतर पर बना है।

तिरुवनामलाई- यहां मिले शिलालेखों के आधार कहा जाता है अन्ना मलाई पर्वत श्रंखला पर भगवान शंकर के इस मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में चोल शासकों ने करवाया था। हालांकि 7वी शताब्दी के साहित्य में इस मंदिर का जिक्र मिलता है। इस मंदिर की विशेषता भी यही है कि यह भी 79 डिग्री पूर्व देशांतर में स्थित है।

तिरुवनाईकवल- महान गणितिज्ञ सीवी रमन की जन्म स्थली और कावेरी नदी के तट पर बने तिरुवनायीकवल मंदिर लगभग 79 डिग्री पूर्व देशांतर पर स्थित है।

चिदंबरम नटराज- यह भगवान शंकर का आकाश स्वरूप लिंगम है। यह मंदिर कब बना यह तो सही-सही नहीं मालूम हां चोल शासकों ने इस मंदिर को खूब दान दिया। नवीं शताब्दी में यह मंदिर भव्यता को प्राप्त हो गया था।

रामेशवरम-  सेतुबंध रामेश्वरम के नाम से विख्यात यह मंदिर भी 79 डिग्री पूर्व देशांतर में स्थित है।

कालेश्वरम-  तेलंगाना में गोदावरी और प्राणहिता के संगम पर स्थित यह कई शताब्दी पुराना है। कहा जाता है कि यहां भगवान शंकर काल यानी यम स्वरूप में है। यहां पूजा अर्चना से मोक्ष मिलता है। इसलिए कालेश्वर-मुक्तेश्वर भी कहा जाता है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यह भी 79 डिग्री पूर्व देशांतर में स्थित है।


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