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नोटबंदी का असर मनरेगा पर भी, नवंबर में 23 फीसदी घटा काम

नई दिल्ली(13 दिसंबर): नोटबंदी की 'कड़वी दवा' ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम को जमकर प्रभावित किया है। रोजगार की गारंटी देने वाली इस स्कीम में पिछले महीने के मुकाबले नवंबर में 23 प्रतिशत रोजगार घटा है।

- नोटबंदी के चलते जिन लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा, उनकी संख्या 23.4 लाख हो गई, जो कि अक्टूबर से दोगुनी है। इतना ही नहीं, पिछले साल नवंबर से यदि तुलना करें तो मनरेगा के तहत मिलने वाले काम में 55 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

- ये आंकड़े बयां कर रहे हैं कि ग्रामीण इलाकों में नोटबंदी के चलते एक यह दर्द भी है, जो गरीब, बेसहारा, मनरेगा पर निर्भर लोगों को सहना पड़ रहा है। झारखंड के सिंहभूमि जिले की सुनिया लगूरी बताती हैं, अगर मनरेगा के तहत काम उपलब्ध रहता तो हमें कम से कम कुछ राहत मिलती, अभी हम थोड़ी-बहुत मजदूरी 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से कर रहे हैं। ज्यादातर वक्त खाली बैठे ही बीत रहा है।'

- उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के मंगू राम बताते हैं, 'शुरुआत के काफी दिन हमने उधार लेकर काम चलाया, लेकिन अब नोटबंदी के पांचवे हफ्ते हालात बद से बदतर होते दिख रहे हैं।'

- बता दें कि वित्त वर्ष 2015-16 में इस योजना पर सबसे ज्यादा यानी 56,000 करोड़ रुपए खर्च हुए। इसमें 12,000 करोड़ रुपए बकाया मजदूरी के भुगतान पर खर्च हुए। इस स्कीम से वर्ष 2015-16 में पिछले 5 साल में सबसे अधिक रोजगार मिला। हालांकि, रोजगार गारंटी स्कीम समय पर भुगतान के मामले में लगातार पिछड़ती जा रही है और अब तक सिर्फ 34.3 फीसदी भुगतान समय पर दिया गया है।


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