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'IS के लड़ाकों को मारना बहुत आसान'

नई दिल्ली ( 28 मई) :  सीरिया में फ्रंटलाइन पर 'जेहादियों' से मोर्चा लेने के बाद लौटी डेनमार्क की एक युवती ने आपबीती सुनाई है। इस युवती का कहना है कि आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के लड़ाकों को मारना बहुत आसान है।  

मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक 24 वर्षीय जोएना पिल्लई ने अपने कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर कुर्दिश फाइटर बनने का फैसला किया। गृहयुद्ध की मार झेल रहे सीरिया में इस तरह का फैसला लेना बहुत जोखिम भरा था। जोएना के मुताबिक वहां एक तरफ आईएस के ठगों से मुकाबला था तो दूसरी तरफ राष्ट्रपति असद के सैनिकों से मोर्चा लेना था।

जोएना के मुताबक उन्हें बंदूक चलानी पहले से आती थी। जोएना ने फ्रंटलाइन पर आईएस के आतंकियों से एक साल तक मोर्चा लिया। जोएना ने दूसरी लड़कियों को भी लड़ाई की ट्रेनिंग दी।  

सीरिया से कोपेनहेगन, डेनमार्क लौटीं जोएना ने आईएस के आतंकियों और राष्ट्रपति असद के लड़ाकों में अंतर बताया। जोएना ने हंसते हुए कहा कि आईएस के लड़ाके अपनी जान खुद ही देने में आमादा रहते हैं। इसलिए उनसे निपटना बहुत आसान है। लेकिन राष्ट्रपति असद के लड़ाके 'किलिंग मशीन' के तौर पर काम करने के लिए पूरी तरह ट्रेंड हैं।    

जोएना ने नवंबर 2014 में अपने कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर रोजोवा, सीरिया का रुख किया था। वो इराक के रास्ते सीरिया पहुंची थीं। फ्रंटलाइन पर पहली रात को ही जोएना को अपने ग्रुप चीफ़ को मरते हुए देखना पड़ा था।

2015 के शुरू में जोएना ने गांव में एक घर के भीतर का दृश्य देखा तो हैरान रह गई थीं। मोसुल, इराक के पास पड़ने वाले सीरिया के इस गांव के घर में लड़कियों को कैद करके रखा गया था। इन्हें आईएस के लड़ाकों के लिए सेक्स स्लेव्स की तरह इस्तेमाल किया जाता था।   

जोएना को डेनमार्क लौटने के तीन दिन बाद ही डेनिश पुलिस से ई-मेल मिला है। इसमें कहा गया है कि उनका पासपोर्ट वैध नहीं रहा है और अगर वो दोबारा सीरिया या इराक वापस गईं तो उन्हें नए कानून के मुताबिक छह साल तक की सज़ा हो सकती है। 


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