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'एयरलिफ्ट' तथ्यों पर आधारित नहीं : विदेश मंत्रालय

नई दिल्ली (29 जनवरी) :  विदेश मंत्रालय ने 1990 में कुवैत से भारतीय लोगों को सुरक्षित निकालने पर आधारित फिल्म 'एयरलिफ्ट'  को मनोरंजनपरक लेकिन तथ्यों की कमी वाला बताया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा है कि यह एक फिल्म है। और फिल्मों में अक्सर तथ्यों के मामले में छूट ली जाती है। इस फिल्म में भी कुवैत में हुई 1990 की घटनाओं में तथ्यों को लेकर 'आर्टिस्टिक लिबर्टीज़' ली गई है।  

विकास स्वरूप ने कहा जिन्हें 1990 के इवेक्यूशन की घटनाएं याद हैं उन्हें पता है कि विदेश मंत्रालय ने किस तरह अति पूर्वसक्रिय (प्रोएक्टिव) भूमिका निभाई थी। विकास स्वरूप ने बताया कि एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल बगदाद और कुवैत भेजा गया था। इस प्रतिनिधिमंडल का काम नागरिक उड्डयन मंत्रालय, एयर इंडिया और कई अन्य सरकारी विभागों में समन्वय स्थापित करना था।

विकास स्वरूप ने कहा कि वो ये सब ज़ोर देकर इसलिए कह सकते हैं क्योंकि वो खुद भी भारतीयों को निकालने के अभियान में फ्रंटलाइन में थे। खास तौर पर तुर्की और सीरिया के रास्ते जो लोग कुवैत से भारत आ रहे थे।

फिल्म में दिखाया गया है कि विदेश मंत्रालय की ओर से प्रोएक्टिव रोल निभाने में चूक की गई थी। विकास स्वरूप ने कहा कि जिन्हें 1990 की घटनाओं की याद नहीं होगी, उन्हें ये निश्चित रूप से ये याद होगा कि हाल में विदेश मंत्रालय की ओर से इराक, लीबिया, यमन और यूक्रेन से लोगों को निकालने के काम को किस तरह समन्वित किया था। 


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