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मणिपुर को इस फौजी की वजह से मिला नया हाइवे, 22 साल पहले इसी जगह खाई थीं सीने पर गोलियां

नई दिल्ली ( 18 दिसंबर ): केंद्र की मोदी सरकार ने मणिपुर के लिए नए नेशनल हाइवे का एलान किया है जो राज्‍य के तामेंगलॉन्‍ग जिले से होकर जाएगा। सरकार ने फैसला इसलिए लिया, क्योंकि नागालैंड को जोड़ने वाले नेशनल हाइवे-2 लगातार होने वाले प्रदर्शनों की वजह से बंद रहता है। जिसकी वजह मणिपुर के लोगों को भारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।नए हाइवे की कहानी 22 साल पुराने एक घटित घटना से जुड़ी है। खबरों के मुताबिक, इसमें भारतीय सेना के ले. कर्नल डीपीके पिल्‍लई का भी बहुत बड़ा योगदान है। 1994 में पिल्‍लई मणिपुर में तैनात थे। उन्‍हें पुलों को उड़ाने वाले उग्रवादियों की तलाश और पकड़ने का कार्य सौंपा गया था।चार साल बाद पिल्‍लई को इन उग्रवादियों के छिपने वाली जगह का पता चला। उग्रवादी लोंगेडिपाब्रम गांव में छुपते थे। पिल्‍लई के नेतृत्‍व में सेना ने हमला बोला। करीब चार घंटे तक चली मुठभेड़ में एक उग्रवादी मारा गया और दो पकड़े गए। इस हमले में प्‍लाटून कमांडर पिल्‍लई भी बुरी तरह से घायल हो गए। उनकी छाती और बांह में गोलियां लगी। साथ ही ग्रेनेड ब्‍लास्‍ट से पैर और राइफल बट से स्‍पाइन में चोट आई। मुठभेड़ के दौरान दो बच्‍चे बीच में आने से जख्‍मी हो गए थे। जब राहत कार्य के लिए हेलिकॉप्‍टर आया तो पिल्‍लई ने उन बच्‍चों को भी इलाज के लिए भिजवाया। पिल्‍लई को उनकी बहादुरी के लिए शौर्य चक्र से भी नवाजा गया।साल 2010 में पिल्‍लई एक बार फिर से उस गांव में पहुंचे और लोगों से पूछा कि उन बच्‍चों का क्‍या हुआ। जब वे गांव गए तो उनका जोरदार स्‍वागत किया गया। बच्‍चों के साथ ही गांव के मुखिया और उन पर फायरिंग करने वाले उग्रवादियों ने भी उनसे मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान पिल्‍लई ने गांववालों से सड़क बनवाने का वादा किया। साल 2010 के बाद से पिल्‍लई गांववालों की हर तरह से मदद कर रहे हैं।


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