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राष्ट्रपति भवन के नीचे गुफा, सुरक्षा एजेंसियों को पता ही नहीं !

नई दिल्ली (14 दिसंबर): दो दिन पहले पुलिस को सूचना मिली कि एक संदिग्‍ध आदमी राष्‍ट्रपति भवन के बॉडीगार्ड लाइंस में पत्थर की दीवार को फांदने की कोशिश कर रहा है। किसी आतंकी हमले की आशंका से पुलिस ने तुरंत एक टीम तैयार की और जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। मशक्कत के बाद पुलिस ने गाज़ी नूरल हसन नाम के व्‍यक्ति को पकड़ा। नूरल हसन को पूछताछ के लिए चाणक्यपुरी पुलिस स्टेशन ले जाया गया।

जब 68 साल के इस व्यक्ति से पूछताछ की गई तो वे ये जानकर वो हैरान रह गए कि वह पिछले 40 सालों से राष्‍ट्रपति भवन के तुगलक काल के स्मारकों के नीचे एक मैली सी गुफा में रहता है। इसे उसने खुद खोदा था। हसन वहां अपने 22 साल के बेटे मोहम्मद नूर के साथ रहता है। पिछले 20 साल से उसके पास वोटर आईडी, पासपोर्ट, वैध इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन है। इनमें पता मज़ार का लिखा हुआ था। हसन का कहना है कि वो ही इसका मुतवल्ली भी है। 

 हसन ने बताया कि वह मूल रूप से उत्तरप्रदेश का रहने वाला है। वह धार्मिक गुरु और उर्दू लेखक था और बाद में वह राष्‍ट्रपति भवन में शिफ्ट हो गया। पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने हसन को धार्मिक गुरु के तौर पर नियुक्त किया था। हसन ने राष्ट्रपति के आग्रह पर कई परिवारों को उर्दू सिखाई। एक बार कुछ जड़ी-बूटियों की खोज करते हुए वह मज़ार तक आ गया। हसन ने बताया कि तब मैंने वहां पर खुदाई करने का और रहने लायक जगह बनाने का फैसला लिया। दीवार कूदने की बात पर हसन ने कहा कि पहले वह बॉडीगार्ड लाइन के गेट से होते हुए ही मैं अंदर जाता था।  अब वह गेट बंद कर दिया जाता है, इसलिए दीवार फांद के जाने के अलावा और कोई चारा ही नहीं है।


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