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Maha Shivaratri 2020: महिमा देश के 12 ज्योतिर्लिंग की

महाशिवरात्रि के मौके पर भोलेनाथ की अराधना के लिए देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों पर इन दिनों खास तैयारियां चल रही है। धर्म में पुराणों के अनुसार जहां-जहां शिवजी स्वयं प्रगट हुए उन 12 स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है।

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नई दिल्ली (14 फरवरी): इन दिनों भारत (India) समेत दुनियाभर में भोले भंडारी के भक्त महाशिवरात्रि (Maha Shivaratri 2020) की तैयारी में जुटे हैं। इस 21 फरवरी को महाशिवरात्रि है। महाशिवरात्रि के मौके पर भोलेनाथ के भक्त खास तरीके से अपने अराध्य की अराधना करते हैं। इसी कड़ी में ज्योतिर्लिंगों (Jyotirlinga) में भी विशेष तैयारी की जाती है। देश में कुल 12 ज्योतिर्लिंग (Twelve Jyotirlinga) हैं। पुराणों के मुताबिक शिवजी (Shivji) जहां-जहां स्वयं प्रगट हुए उन 12 स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है। भगवान शिव के इन ज्योतिर्लिंग को प्रकाश लिंग भी कहा जाता है। ये पूजा के लिए भगवान शिव के पवित्र धार्मिक स्थल और केंद्र हैं। शिव को स्वयम्भू के रूप में भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है स्वयं उत्पन्न। मान्यता के मुताबिक इन 12 ज्योतिर्लिंग पर भगवान शिव स्वयं ज्योति रूप में विराजमान हैं। कहा जाता है कि बारह ज्योतिर्लिंगों का दर्शन करने वाला प्राणी सबसे भाग्यशाली होता है। शिवपुराण में सभी 12 ज्योतिर्लिंगों का सही क्रम और उनसे जुड़ी खास जानकारी वर्णित है। यहां सालों भर भोले भंडारी के भक्तों की भीड़ लगी रहती है। 

वैसे तो ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं, लेकिन शिव पुराण के अनुसार उस समय आसमान से ज्योति पिंड पृथ्वी पर गिरे और उनसे पूरी पृथ्वी पर प्रकाश फैल गया। इन्हीं पिंडों को 12 ज्योतिर्लिंग का नाम दे दिया गया है। वहीं इसके पीछे एक कहानी यह भी है कि ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति भगवान शंकर और भगवान ब्रह्मा के विवाद को निपटाने के लिए हुई थी।

आइए जानते हैं भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग और इसके महत्व के बारे में...

1.सोमनाथ (Somnath)- गुजरात के सौराष्ट्र स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को इस पृथ्वी का भी पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। बताया जाता है कि इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं चंद्रदेव ने की थी। इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है। इसे अब तक 17 बार नष्ट किया गया है और हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया। शुरूआत से ही सोमनाथ मंदिर हिंदू धर्म के उत्थान और पतन के इतिहास का प्रतीक रहा है। सोमनाथ देश के सबसे अधिक पूजे जाने वाले तीर्थस्थलों में से एक है। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की कहानी के अनुसार चंद्रमा ने दक्ष प्रजापति की 27 बेटियों से शादी की थी, लेकिन चंद्रमा ने एक पत्नी रोहिणी को छोड़कर बाकी सभी पत्नियों को त्याग दिया, जिसके बाद प्रजापति द्वारा चंद्रमा को क्षय रोग होने का श्राप दिया गया। इस श्राप से छुटकारा पाने और अपनी खोई हुई चमक और सुंदरता को वापस पाने के लिए इसी जगह पर भगवान शिव की अराधना कर चंद्रमा ने श्राप से मुक्ति पाई थी।

2.मल्लिकार्जुन (Mallikarjuna)- आंध्र प्रदेश में मद्रास के पास कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नाम के पर्वत पर मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग स्थित है। इस मंदिर का महत्व भगवान शिव के कैलाश पर्वत के समान कहा गया है। कहते हैं कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने मात्र से ही व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिलती है और दैहिक, दैविक और भौतिक ताप नष्ट हो जाते हैं। ये सती के 52 भक्ति पीठों में से एक भी है।

3.महाकालेश्वर (Mahakaleshwar)- यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन में क्षिप्रा नदी के किनारे पर स्थित है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की विशेषता है कि ये एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। इस मंदिर के बारे में बताया जाता है कि मंदिर का निर्माण पांच साल के लड़के श्रीकर ने कराया था। कहा जाता है कि श्रीकर उज्जैन के राजा चंद्रसेन की भक्ति से काफी प्रेरित था। यहां की भस्मारती दुनियाभर में प्रसिद्ध है। लोगों का मानना है कि ये ही उज्जैन की रक्षा कर रहे हैं।.

 

4.ओंकारेश्वर (Omkareshwar)- यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में नर्मदा किनारे मान्धाता पर्वत पर स्थित है। बताया जाता है कि इनके दर्शन से पुरुषार्थ चतुष्टय की प्राप्ति होती है। यह ज्योतिर्लिंग औंकार अर्थात ऊं का आकार लिए हुए है, इस कारण इसे ओंकारेश्वर नाम से जाना जाता है। नर्मदा नदी के बहने से पहाड़ी के चारों ओर ओम का आकार बनता है। ओंकारेश्वर मंदिर का एक पौराणिक महत्व भी है। मान्यता के मुताबिक एक बार देवता और दानवों के बीच युद्ध हुआ और देवताओं ने भगवान शिव से जीत की प्रार्थना की। प्रार्थना से संतुष्ट होकर भगवान शिव यहां ओंकारेश्वर के रूप में प्रकट हुए और देवताओं को बुराई पर जीत दिलाकर उनकी मदद की।

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5. केदारनाथ (Kedarnath)- यह ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड के हिमालय की केदारनाथ नामक चोटी पर स्थित है। यह अलकनंदा व मंदाकिनी नदियों के तट पर स्थित है। बाबा केदारनाथ का मंदिर बद्रीनाथ के मार्ग में स्थित है। केदारनाथ का वर्णन स्कन्द पुराण एवं शिव पुराण में भी मिलता है। यह हिंदू धर्म के चार धामों में से एक माना जाता है। केदारानाथ जाने वाले तीर्थयात्री पवित्र जल लेने के लिए सबसे पहले गंगोत्री और यमुनोत्रि जाते हैं , जिसे वे केदारनाथ शिवलिंग को अर्पित करते हैं। बेहद ठंडे मौसम और बर्फबारी के कारण यह मंदिर साल में केवल 6 महीने मई से जून तक खुलता है। माना जाता है कि केदारनाथ के दर्शन करने के बाद व्यक्ति का जीवन सफल हो जाता है। प्रसिद्ध हिंदू संत शंकराचार्य की समाधि केदारानाथ मंदिर के ठीक पीछे स्थित है। 

6.विश्वनाथ (Kashi Viswanath)- यह शिवलिंग उत्तर प्रदेश के वाराणसी यानी काशी में स्थित है। मन्यता के मुताबिक हिमालय को छोड़कर भगवान शिव ने यहीं स्थायी निवास बनाया था। ऐसा कहा गया है कि प्रलय काल का इस नगरी में कोई असर नहीं पड़ता, इसलिए सभी धर्म स्थलों में काशी का अत्यधिक महत्व कहा गया है। साल 1780 में महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित यह ज्योतिर्लिंग हिन्दुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। बताया जाता है कि भगवान शिव ने यहां निवास कर सभी को खुशी और मुक्ति प्रदान की थी। इस जगह के बारे में माना जाता है कि प्रलय आने पर भी विश्वनाथ मंदिर डूबेगा नहीं बल्कि ऐसे ही बना रहेगा। इसकी रक्षा करने के लिए खुद भगवान शिव इस जगह को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेंगे और प्रलय टल जाने पर काशी को उसकी फिर से जगह दे देंगे।

7.भीमाशंकर (Shree Bhimashankar)- भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे जिले में सह्याद्रि नामक पर्वत पर स्थित है। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। यहां से भीमा नामक नदी बहती है जो दक्षिण पश्चिम दिशा में बहती हुई रायचूर जिले में कृष्णा नदी से मिलती है। मान्यता है कि जो भक्त श्रृद्धा से इस मंदिर के प्रतिदिन सुबह सूर्य निकलने के बाद दर्शन करता है, उसके सात जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं।

8.त्र्यंबकेश्वर(Trimbakeshwar)- यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक से 30 किमी पश्चिम में गोदावरी नदी के करीब स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग के सबसे अधिक निकट ब्रह्मागिरि नाम का पर्वत है। इसी पर्वत से गोदावरी नदी शुरू होती है। आपको बता दें कि भगवान शिव का एक नाम त्र्यंबकेश्वर भी है। शिव पुराण के अनुसार गोदावरी नदी और गौतमी ऋषि ने भगवान शिव से यहां निवास करने की विनती की थी इसलिए यहां भगवान शिव त्रयंबकेश्वर के रूप में प्रकट हुए। इस ज्योतिर्लिंग का सबसे अनोखा हिस्सा इसका आकार है। एक तीर्थस्थल के बजाए यहां एक खंभा है, जिसमें तीन खंभे हैं। ये तीन खंभे सबसे शक्तिशाली और आधिकारक देवताओं ब्रह्मा , विष्णु और महेश का प्रतिनिधित्व करते हैं। 

9.वैद्यनाथ (Baba Baidyanath)- झारखंड के संथाल परगना के दुमका नामक जनपद में यह शिवलिंग है। देश के सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले ज्योतिर्लिंग में से एक है। पौराणिक कथाओं और 12 ज्योतिर्लिंग कहानी के अनुसार यहां रावण ने वर्षों तक शिव की अराधना की थी और शिव को लंका में आमंत्रित कया था। शिव ने शिवलिंग के रूप में खुद को रावण को सौंपा और कहा कि लंका के पहुंचने तक ये शिवलिंग नीचे नहीं गिरना चाहिए, लेकिन रावण ने भगवान शिव की अवज्ञा की और लंका पहुंचने से पहले ही शिवलिंग उनके हाथों से नीचे गिर गया। जहां ये शिवलिंग गिरा वहीं भगवान शिव देवघर में वैद्यनाथ के रूप में निवास करने लगे। सावन के महीने में यहां ज्यादा पदयात्रा होती हैं, लोगों का मानना है कि यहां भगवान शिव की आराधना करने से सभी दुखों से मुक्ति मिलती है।

10.रामेश्वर (Rameshwaram)- यह ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु के रामनाथ पुरं नामक स्थान में स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम द्वीप पर स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग भारत के चार धामों में से एक है।  बताया जाता है कि लंका पर चढ़ाई से पहले भगवान राम ने शिवलिंग की स्थापना की थी। भगवान राम के द्वारा स्थापित होने के कारण ही इस ज्योतिर्लिंग को भगवान राम का नाम रामेश्वरम दिया गया। माना जाता है कि भगवान राम ने रावण के वध के बाद इस ज्योतिर्लिंग की पूजा की थी। यह मंदिर समुद्र से घिरा हुआ है। इस ज्योतिर्लिंग पर जाने वाले भक्त धनुषकोटि समुद्र तट पर भी जाते हैं, जहां से भगवान राम ने अपनी पत्नी को बचाने के लिए रामसेतु का निर्माण किया था। 

देश में दक्षिणी ज्योतिर्लिंग रूप में पूजा जाता है रामेश्वरम का ज्योतिर्लिंग। 

11.नागेश्वर(Nageshwar)- यह ज्योतिलिंग गुजरात में द्वारकापुरी से 17 मील दूर स्थित है।  यह मंदिर गोमती द्वारका और बैत द्वारका के बीच गुजरात में सौराष्ट्र के तट पर स्थित है। कहते हैं कि भगवान की इच्छानुसार ही इस ज्योतिलिंग का नामकरण किया गया है। बताया जाता है कि जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ यहां दर्शनों के लिए आता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा के अनुसार नागेश्वर को इस धरती का सबसे शक्तिशाली 12 ज्योतिर्लिंग में से एक माना गया है, जो सभी प्रकार के जहरों के संरक्षण का प्रतीक है। भूमिगत गृभग्रह में स्थित नागेश्वर महादेव के पवित्र मंदिर में आशीर्वाद लेने हजारों भक्त हर साल यहां पहुंचते हैं। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग  मंदिर में 25 मीटर ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा , बड़े बगीचे और नीले सागर का अबाधित दृश्य पयर्टकों को मोहित कर देता है।

12.घृष्णेश्वर(Grishneshwar)- यह ज्योतिर्लिंग औरंगाबाद के अजंता और एलोरा की गुफाओं के पास वेरूल गांव में स्थित है। अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित इस मंदिर को ग्रुमेश्वर और कुसुमेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। यहां लाल चट्टान पर उकेरी गई विष्णु की दशावतार मूर्ति आकर्षण का केंद्र है। प्रभावशाली लाल चट्टानों के साथ 5 मंजिला शिखर शैली की संरचना, देवी देवताओं की नक्काशी और मुख्य दरबार हॉल में विशाल नंदी बैल घृष्णेश्वर मंदिर के आकर्षण का केंद्र है। यहां दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं और आत्मिक शांति प्राप्त करते हैं। 

हिंदू धर्म में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग का खास महत्व है। देश के 12 विभिन्न स्थानों पर स्थित भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग अपनी देश की एकता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार जो व्यक्ति पूरे 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर ले, उसे मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसके सभी संकट और बाधाएं दूर हो जाती है। हालांकि जीवन में इन सभी 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन हर कोई नहीं कर पाता, सिर्फ किस्मत वाले लोगों को ही इन ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। 

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