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लोकसभा चुनाव: यूपी की इन तीन सीटों पर होगी दिलचस्प जंग

23 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में यूपी की 10 सीटों पर चुनाव होना है। इनमें बदायूं सीट पर बीजेपी अपने इतिहास में सिर्फ एक बार 1991 में जीत का स्वाद चख पाई है। वहीं, संभल और मुरादाबाद सीट बीजेपी 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में पहली बार जीती थी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बीजेपी इन सीटों पर दोबारा जीत का परचम लहरा पाएगी। अगर स्थानीय समीकरणों पर गौर करें तो बीजेपी के सामने इन सीटों पर बहुत बड़ी चुनौती है। तो देखना ये है कि क्या बीजेपी वेस्ट यूपी की तीन सीटों पर 'डबल धमाल' कर पाएगी?

न्यूज 24 ब्यूरो,नई दिल्ली (20 अप्रैल): 23 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में यूपी की 10 सीटों पर चुनाव होना है। इनमें बदायूं सीट पर बीजेपी अपने इतिहास में सिर्फ एक बार 1991 में जीत का स्वाद चख पाई है। वहीं, संभल और मुरादाबाद सीट बीजेपी 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में पहली बार जीती थी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बीजेपी इन सीटों पर दोबारा जीत का परचम लहरा पाएगी। अगर स्थानीय समीकरणों पर गौर करें तो बीजेपी के सामने इन सीटों पर बहुत बड़ी चुनौती है। तो देखना ये है कि क्या बीजेपी वेस्ट यूपी की तीन सीटों पर 'डबल धमाल' कर पाएगी?  

यूपी की बदायूं सीट में 28 साल पहले 1991 में पहली बार बीजेपी का कमल खिला था। तब बीजेपी नेता चिन्मयानंद ने 15 हजार वोटों से जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े दिग्गज नेता शरद यादव को धूल चटा दी थी। इसके बाद यहां बीजेपी कभी झंडे नहीं गाड़ पाई। बदायूं सीट पर मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेंद्र यादव दो बार से लगातार सांसद हैं। इस बार भी गठबंधन से वही चुनाव मैदान में हैं। इस बार बीजेपी ने मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य को उम्मीदवार बनाया है। वह पिछले कई साल से सक्रिय राजनीति का हिस्सा हैं। वहीं कांग्रेस ने सलीम इकबाल शेरवानी को मैदान में उतारा है। 2014 के चुनाव में मोदी लहर के बावजूद एसपी ने यहां पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी, ऐसे में अब जब एसपी-बीएसपी के बीच गठबंधन हो गया है तो बीजेपी के लिए यहां से राह आसान नहीं दिख रही। वहीं, बीजेपी को उम्मीद है कि संघमित्रा की वजह से पार्टी एसपी के पिछड़े वोटबैंक में बड़ी सेंध लगाएगी। वहीं, कांग्रेस के मुस्लिम प्रत्याशी होने की वजह से वोटों का बंटवारा भी बीजेपी के पक्ष में जा सकता है।2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार मोदी लहर में बीजेपी ने मुरादाबाद में जीत दर्ज की थी। इस बार बीजेपी उम्मीदवार कुंवर सर्वेश सिंह के सामने गठबंधन की दीवार है। मुरादाबाद में गठबंधन उम्मीदवार एसटी हसन के साथ ही कांग्रेस ने भी मुस्लिम प्रत्याशी मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी को मैदान में उतारा है। बीजेपी को उम्मीद है कि मुस्लिम मतों के गठबंधन और कांग्रेस में बंट जाने से पार्टी को फायदा मिल सकता है। दूसरी तरफ बीएसपी के साथ आने से एसपी उम्मीदवार को अपनी मजबूती दिखाई दे रहा है। 2014 में कुंवर सर्वेश कुमार सिंह को 4 लाख 85 हजार वोट, एसटी हसन को 3 लाख 97 हजार वोट और बीएसपी प्रत्याशी हाजी मोहम्मद याकूब को 1 लाख 60 हजार वोट मिले थे। अब गठबंधन को उम्मीद है कि एसपी-बीएसपी के वोट मिलकर बीजेपी को हरा सकते हैं।संभल सीट में 2014 के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी। बीजेपी नेता सत्यपाल सिंह महज 5 हजार मतों से एसपी के प्रत्याशी शफीकुर्ररहमान बर्क को हराने में कामयाब रहे थे। बीएसपी के अकील उर रहमान खान तीसरे नंबर पर रहे थे। तब एसपी और बीएसपी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। इस बार बीजेपी के सामने गठबंधन की मजबूत दीवार है, जिसे तोड़ पाना पार्टी के लिए असान नहीं होगा। इस बार बीजेपी ने परमेश्वर लाल सैनी को मैदान में उतारा है। एसपी की तरफ से शफीकुर्ररहमान बर्क और कांग्रेस ने मेजर जगत पाल सिंह को टिकट दिया है।  मुख्य मुकाबला बीजेपी और गठबंधन के बीच माना जा रहा है। एक तरह से देखा जाए तो कांग्रेस ने यहां जगत पाल को उतारकर बीजेपी की राह में कांटे ही बिछाए हैं। संभल लोकसभा में भी मुस्लिम वोटरों का वर्चस्व है। कोई अन्य मजबूत मुस्लिम उम्मीदवार नहीं होने की वजह से गठबंधन यहां से जीत की पूरी उम्मीद के साथ मैदान में है। वहीं, बीजेपी को उम्मीद है कि एसपी उम्मीदवार की कट्टरवादी छवि, राष्ट्रवाद के रथ पर सवार होकर बीजेपी जीत हासिल करेगी। 

(Images Courtesy:Google)


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