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आजाद भारत के सबसे बड़े महानायक, इंदिरा से भी आगे निकले मोदी !

लोकसभा के नतीजों के बाद ये साफ हो गया है कि अपराजेय मोदी को चुनौती देने वाला फिलहाल देश की सियासत में दूसरा कोई चेहरा नहीं।सत्तर के दशक में भी ऐसी ही तस्वीर बनी थी जब इंदिरा गांधी का कद और करिश्मा सबसे बड़ा हो गया था। इसकी वजह सिर्फ उनका व्यक्तित्व नहीं बल्कि उनकी जबर्दस्त कार्यशैली भी थी

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (14 मई): लोकसभा के नतीजों के बाद ये साफ हो गया है कि अपराजेय मोदी को चुनौती देने वाला फिलहाल देश की सियासत में दूसरा कोई चेहरा नहीं।सत्तर के दशक में भी ऐसी ही तस्वीर बनी थी जब इंदिरा गांधी का कद और करिश्मा सबसे बड़ा हो गया था। इसकी वजह सिर्फ उनका व्यक्तित्व नहीं बल्कि उनकी जबर्दस्त कार्यशैली भी थी, जिसमें जनता का हित और देश का विकास दोनों शामिल रहे। मसला आर्थिक सुधार का हो या गरीबी मिटाने का इंदिरा की तरह मोदी ने भी कई साहसिक फैसले लिए हैं। खास कर देश की सुरक्षा को लेकर मोदी की नीति भी इंदिरा की तरह ही आक्रामक रही है। 1971 की भारत-पाक लड़ाई वो जंग थी जिसने पाकिस्तान के सीने पर हमेशा के लिए हिंदुस्तान के हौसले की मुहर लगा दी। इस जंग में शानदार जीत का श्रेय हिंदुस्तान के जांबाज सैनिकों के जौहर के साथ इंदिरा गांधी के कुशल नेतृत्व और रणनीतिक तैयारी को मिला। जिन्होंने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर उसे हमेशा के लिए पस्त कर दिया । और ये पाकिस्तान के आतंकी चेहरे पर दर्ज हिंदुस्तान का वो तमाचा है जिसने सरहद पार बैठे दहशतगर्दों को कभी न भूलने वाला सबक सिखा दिया। उरी आतंकी हमले के बाद पीओके में घुसकर इस सर्जिकल स्ट्राइक को सफल बनाने का श्रेय हिंदुस्तान के सैनिकों के हौसले के साथ साथ पीएम मोदी के उस जज्बे को जाता है जिन्होंने आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस अपनाते हुए पाकिस्तान को उसी की जुबान में जवाब दिया।

इतना ही नहीं जब पाकिस्तान की शह पर पुलवामा में आतंकियों ने हमारे जवानों को अपना निशाना बनाया तो वो मोदी ही थे जिनके आदेश पर हिंदुस्तान की एयरफोर्स ने पाकिस्तान में घुसकर उसके कई आतंकी ठिकानों को मटियामेट कर दिया। मतलब साफ है जिस तरह इंदिरा गांधी ने देश हित से समझौता किए बगैर हिंदुस्तान के दुश्मनों को दहलाया उसी तरह नरेंद्र मोदी ने भी देश की सुरक्षा के लिए हर वो कदम उठाया जो जरूरी था। साठ और सत्तर के दशक में जब देश में आर्थिक सुधार की सख्त जरूरत थी तब इंदिरा गांधी ने बारी बारी से देश के 20 से भी ज्यादा निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण करके आम जनता का भरोसा जीत लिया।

आर्थिक मोर्च पर भी इंडिया ने सुधार कई कड़े कदम उठाए। उन्होंने 19 जुलाई 1969 को 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया। साथ 1980 में 7 और बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया। नरेंद्र मोदी ने भी प्रधानमंत्री बनने के बाद काला धन और भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाते हुए नोटबंदी का फैसला लिया जिसने देश और दुनिया को हैरान कर दिया।हालांकि अचानक हुई इस नोटबंदी से लोगों को काफी मुश्किलें भी आईं और विपक्ष ने इसे लेकर सरकार की कड़ी आलोचना भी की। पर काले धन के खिलाफ लड़ाई में देश की आम जनता ने इस फैसले को हाथों हाथ लिया और उसके बाद हुए यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी को भारी बहुमत देकर अपना इरादा साफ कर दिया।

1971 में जब पूरा विपक्ष इंदिरा हटाओ के नारे पर चुनाव लड़ रहा था तब इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया और जनता ने कांग्रेस को लोकसभा की 352 सीटें थमाकर उनके वादे पर भरोसा जताया। 1975 में इंदिरा गांधी ने 20 सूत्रीय योजना शुरू की जिसमें गरीबी दूर करने, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली जैसे मुद्दों पर खास तौर से फोकस किया गया।नरेंद्र मोदी ने भी प्रधानमंत्री बनने के बाद गरीबी और बेरोजगारी के खिलाफ दस सूत्री योजना की शुरुआत की। इसके अलावा पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्का मकान, स्वास्थ्य के लिए आयुष्मान योजना, बीपीएल परिवारों तक गैस कनेक्शन पहुंचाने के लिए उज्जवला योजना, गांव गांव बिजली और स्वच्छ भारत अभियान के तहत घर घर शौचालय जैसी योजनाओं को जमीन पर लागू किया। जिसका फायदा करोड़ों लोगों को मिला और नतीजा ये हुआ कि जनता ने उन्हें फिर से प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता की बागडोर सौंप दी।


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